आरआईएल के खिलाफ 447 करोड़ लौटाने का आदेश रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड के शेयरों के कारोबार से जुड़े मामले में 447.27 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश रद्द कर दिया। न्यायालय ने सेबी के आदेश पर विचार करते हुए कहा कि सैट ने धोखाधड़ी से संबंधित निष्कर्ष निकालने में त्रुटि की।

नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड (आरपीएल) के शेयरों के कारोबार से जुड़े मामले में 447.27 करोड़ रुपये लौटाने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) को दिए गए निर्देश को शुक्रवार को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने मुंबई स्थित प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) के नवंबर, 2020 के आदेश को चुनौती देने वाली आरआईएल की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया। सैट ने 2:1 के बहुमत से आरआईएल की उस अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के 24 मार्च, 2017 के आदेश को चुनौती दी थी। सेबी ने आरपीएल के शेयरों की नवंबर, 2007 में हुई बिक्री से जुड़े मामले में आरआईएल को यह राशि लौटाने का आदेश दिया था.
न्यायालय का निर्णय
पीठ ने आरआईएल की अपील का निपटान करते हुए कहा कि न्यायाधिकरण ने बहुमत के अपने फैसले में सेबी के ‘धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार गतिविधियों पर निषेध’ (पीएफयूटीपी) नियम, 2003 के प्रावधानों के तहत धोखाधड़ी से संबंधित निष्कर्ष निकालने में गंभीर त्रुटि की। शीर्ष अदालत ने 136 पन्नों के अपने आदेश में कहा कि इस आधार पर सैट के आदेश को बरकरार नहीं रखा जा सकता। हालांकि, पीठ ने खुलासा नियमों के उल्लंघन के मामले में सैट की टिप्पणी से सहमति जताते हुए कहा कि इस संबंध में आरआईएल पर जुर्माना लगाया जा सकता है.
आरआईएल की अपील का निपटान
पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में आरआईएल की अपील आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है और पैसे लौटाने का आदेश भी रद्द किया जाता है। इसके साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि निवेशक संरक्षण कोष में आरआईएल द्वारा जमा कराए गए 250 करोड़ रुपये उसे वापस किए जाएं। यह राशि सुप्रीम कोर्ट के 17 दिसंबर 2020 के अंतरिम आदेश के तहत जमा कराई गई थी। पीठ ने कहा कि सैट ने यह मानकर आरआईएल की अपील खारिज की थी कि कंपनी ने आरपीएल के शेयरों के कारोबार में कीमतों को प्रभावित कर वायदा बाजार में 447.27 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ कमाया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि वर्ष 2007 में आरपीएल, आरआईएल की 75 प्रतिशत हिस्सेदारी वाली एक अनुषंगी कंपनी थी.
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