Supreme Court Calls for Nationwide Firecracker Ban to Ensure Pollution-Free Environment दिल्ली-एनसीआर में लगे पटाखे पर प्रतिबंध पूरे देश में होने चाहिए- सुप्रीम कोर्ट, Delhi Hindi News - Hindustan
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दिल्ली-एनसीआर में लगे पटाखे पर प्रतिबंध पूरे देश में होने चाहिए- सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध को पूरे देश में लागू करने का सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि सभी नागरिकों को प्रदूषण मुक्त हवा का अधिकार है। केंद्र सरकार ने...

Newswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्लीFri, 12 Sep 2025 06:18 PM
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दिल्ली-एनसीआर में लगे पटाखे पर प्रतिबंध पूरे देश में होने चाहिए- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली-एनसीआर में लगे पटाखों पर प्रतिबंध के आदेश को देशभर में लागू किया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा है कि ‘सिर्फ दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों को ही नहीं, बल्कि देशभर के सभी नागरिकों को प्रदूषण मुक्त स्वच्छ वातावरण में रहने का अधिकार है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ की पीठ दिल्ली एनसीआर में पराली जलाने सहित विभिन्न स्रोतों से होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए करीब 40 साल पहले एमसी मेहता द्वारा दाखिल जनहित याचिका से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह मौखिक टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा सरकार को दिल्ली की तर्ज पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने के निर्देश जारी करने का आदेश दिया था। पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक दिल्ली एनसीआर में पटाखों के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गय है। इस अवसर मुख्य न्यायाधीश गवई ने मौखिक तौर पर कहा कि ‘यह कहना गलत होगा कि प्रदूषण मुक्त हवा का अधिकार केवल दिल्ली-एनसीआर में रहने वालों के लिए है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि ‘यदि एनसीआर में रहने वाले लोग प्रदूषण मुक्त हवा में रहते के हकदार हैं, तो देश के अन्य हिस्सों के नागरिक क्यों नहीं? ...सिर्फ इसलिए कि यह राजधानी है या सर्वोच्च न्यायालय यहां स्थित है, यहां रहने वाले लोगों को प्रदूषण मुक्त स्वच्छ हवा मिलनी चाहिए, लेकिन देश के अन्य नागरिकों को नहीं? मुख्य न्यायाधीश गवई की इस टिप्पणी के बाद केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति बहुत खराब हो जाती है। उन्होंने कहा ‘माई लॉर्ड्स, हम सचमुच घुटते हैं, सर्दियों में तो बहुत मुश्किल हो जाता है। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश गवई ने ‘इस बात पर प्रकाश डाला कि पंजाब जैसे अन्य राज्यों में भी वायु प्रदूषण की स्थिति उतनी ही गंभीर है, जितनी दिल्ली एनसीआर में। उन्होंने अपने निजी अनुभव को साझा करते हुए कह कि पिछली सर्दियों में मैं अमृतसर में था। मुझे बताया गया कि पंजाब में वायु प्रदूषण दिल्ली से भी बदतर है... इसलिए जो भी नीति हो, वह अखिल भारतीय स्तर पर होनी चाहिए, हम दिल्ली के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं कर सकते क्योंकि यहां के लोग इस देश के सुविधा संपन्न (इलाइट) नागरिक हैं। प्रदूषण के वास्तविक पीड़ित गरीब-मजदूर वर्ग हैं- केंद्र हालांकि केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ के समक्ष स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण की समस्या को कुलीन वर्ग नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि दिवाली के दौरान जब प्रदूषण चरम पर होती है तो सुविधा संपन्न/कुलीन लोग दिल्ली से बाहर चले जाएंगे, लेकिन प्रदूषण से वास्तविक पीड़ित गरीब और मजदूर हैं जिनके पास एयर प्यूरीफायर भी नहीं हैं। इसके बाद शीर्ष अदालत ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को दिल्ली में वायु गुणवत्ता की स्थिति के बारे में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। अक्टूबर से फरवरी तक प्रतिबंध उचित होता- न्याय मित्र सुनवाई के दौरान मामले नियुक्त न्याय मित्र व वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने शीर्ष अदालत से कहा कि पटाखों पर प्रतिबंध ‘अक्टूबर से फरवरी तक की अवधि के लिए उचित होता। उन्होंने कहा कि पटाखों के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने कई लोगों की आजीविका प्रभावित होगी।

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