‘साइबर ठगी के जरिए 54,000 करोड़ की हेराफेरी ‘डकैती’ के समान’
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल गिरफ्तारी और साइबर धोखाधड़ी से 54,000 करोड़ रुपये की हेराफेरी को 'लूट' बताया। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह आरबीआई, बैंकों और संचार विभाग के साथ मिलकर चार सप्ताह में मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करे। सीबीआई को भी डिजिटल गिरफ्तारी के मामलों की पहचान करने का आदेश दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को डिजिटल गिरफ्तारी और साइबर धोखाधड़ी के जरिए 54,000 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी को पूरी तरह से ‘लूट या डकैती’ बताया। अदालत ने कहा कि यह रकम कई छोटे राज्यों के सालाना बजट से भी अधिक है। ये आंकड़े नवंबर 2021 से नवंबर, 2025 तक के हैं। शीर्ष अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए साइबर ठगी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार को भारतीय रिजर्व बैक (आरबीआई), बैंकों और संचार विभाग जैसे हित धारकों के साथ विचार विमर्श करने को कहा और 4 सप्ताह में एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने यह देखते हुए कि ऐसे अपराध बैंक अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही के कारण हो सकते हैं, इसलिए आरबीआई और बैंकों से समय पर सख्त कार्रवाई करने की जरूरत पर बल दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि बैंकों की भी यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसी प्रणाली विकसित करें जिससे खाता धारकों को ‘डिजिटल गिरफ्तारी स्कैम’ में फंसने के बाद किए जा रहे बड़े ट्रांजैक्शन रोकने के लिए अलर्ट किया जा सके। उन्होंने कहा कि जब कोई सेवानिवृत्त व्यक्ति, जो आमतौर पर सिर्फ 10,000 या 20,000 रुपये अपने खाते से निकलता है और अचानक 25 लाख या 50 लाख रुपये की निकासी करता है, तो बैंकों को अलर्ट जारी करना चाहिए। सीजेआई ने कहा कि बैंकों को भी साइबर धोखाधड़ी रोकने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई बिजनेस एंटिटी (व्यापार इकाई) है जिसके करोड़ों में लेनदेन होते हैं, तो शायद शक न हो। एक पेंशनभोगी के खाते से अचानक 50 लाख, 70 लाख, 1 करोड़ निकलने लगे तो बैंक उसे अलर्ट करना सही क्यों नहीं समझता कि यह लेनदेन संदिग्ध है। इस पर भारत सरकार के अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने पीठ से कहा कि आरबीआई इस गंभीरता से ध्यान देगा। इसके साथ ही स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। आरबीआई हमारे आदेशों का इंतजार न करे इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हमें भरोसा है कि आप हमारे निर्देशों का इंतजार नहीं करेंगे। यदि आरबीआई कोई तंत्र विकसित कर सकता है तो ठीक अन्यथा हम दिशा-निर्देश पारित करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि संदिग्ध ट्रांजैक्शन की परिभाषा बैंकों के लिए विचार का मुख्य बिंदु है। बैंक ज्यादा बिजनेस मोड में हैं : जस्टिस बागची जस्टिस बागची ने भी कहा कि समस्या यह है कि बैंक ज्यादा बिजनेस मोड में हैं। ऐसा करने में, वे जाने-अनजाने में ऐसे मंच बन रहे हैं जिनके जरिए अपराध से कमाए गए चोरी के पैसे का तेजी से और बिना किसी रुकावट के लेन-देन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय की ओर से दाखिल रिपोर्ट में ही कहा गया कि अप्रैल 2021 से नवंबर 2025 तक साइबर धोखाधड़ी के जरिए 54,000 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई है। आरबीआई ने एसओपी बनाई है सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया गया कि आरबीआई ने एक एसओपी बनाई है जिसमें साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए बैंकों द्वारा डेबिट कार्ड को अस्थायी रूप से रोकने के लिए कार्रवाई करने का प्रावधान है। जनता के पैसे के ट्रस्टी हैं बैंक : सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुनाफा कमाने की ज्यादा चिंता में, बैंकों को यह समझना चाहिए कि वे जनता के पैसे के ट्रस्टी हैं। लोगों ने इसलिए पैसे जमा किए हैं क्योंकि उन्हें बैंकों पर भरोसा है। ये बैंक जनता के लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी बनते जा रहे हैं। कोर्ट उनके रिकवरी एजेंट बन रहे हैं। वे लापरवाही से लोन देते हैं और फिर आपके पास वसूली के लिए एनसीएलटी तो है ही। मुआवजा देने के लिए फ्रेमवर्क तैयार करें सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई को बैंकों, संचार विभाग और अन्य के साथ विचार विमर्श करके डिजिटल गिरफ्तारी के मामलों में पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करने को कहा है। पीठ ने डिजिटल गिरफ्तारी के पीड़ितों को मुआवजा देने के मामले में एक व्यावहारिक और उदार दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। डिजिटल गिरफ्तार की पहचान करे सीबीआई शीर्ष अदालत ने सीबीआई को डिजिटल गिरफ्तारी के मामलों की पहचान करने का निर्देश दिया और गुजरात और दिल्ली सरकार को पहचाने गए डिजिटल गिरफ्तारी के मामलों में जांच आगे बढ़ाने के लिए सीबीआई जांच को मंज़ूरी देने को आदेश दिया है।
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