जख्मी होने के चलते सेवामुक्त प्रशिक्षु को क्या पूर्व सैनिक मान सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या प्रशिक्षण के दौरान घायल हुए दिव्यांग सैन्य प्रशिक्षुओं को सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिल सकता है। न्यायालय ने बताया कि 80 से 90 फीसदी कैडेट्स का पुनर्वास संभव है, लेकिन उन्हें पूर्व सैनिक का दर्जा नहीं मिलने से रोजगार में कठिनाई हो रही है।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से यह बताने के लिए कहा कि ‘क्या प्रशिक्षण के दौरान दुर्घटनावश जख्मी होने के बाद दिव्यांगता के कारण बाहर किए गए सैन्य प्रशिक्षुओं को सरकारी और अर्ध-सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ लेने के लिए पूर्व सैनिक माना जा सकता है। जस्टिस बीवी नागरात्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने इस बारे में केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से निर्देश प्राप्त करने को कहा है। पीठ ने ऐसे कैडेट्स को होने वाली कठिनाइयों से जुड़े एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रही वरिष्ठ वकील रेखा पल्ली ने पीठ को बताया कि ऐसे लगभग 80 से 90 फीसदी कैडेट्स का पुनर्वास किया जा सकता है, लेकिन उन्हें रोजगार नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें आरक्षण से भी वंचित रखा जाता है क्योंकि उन्हें पूर्व सैनिक का दर्जा नहीं दिया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि लगभग 10 प्रतिशत कैडेट्स गंभीर रूप से प्रभावित हैं और हो सकता है कि वे हिलने-डुलने की स्थिति में भी न हों और उन्हें सहायता की आवश्यकता हो।
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