
परियोजना के लिए बीएमसी को पेड़ काटने की अनुमति
गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के लिए शीर्ष अदालत ने दी इजाजत बदले में पेड़ लगाने का
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुंबई में गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड परियोजना के लिए और पेड़ काटने की बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को अनुमति दे दी। अदालत ने बीएमसी की नई याचिका पर कहा कि बदले में पेड़ लगाने का काम पूरी ईमानदारी से होना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव द्वारा दायर हलफनामे पर संज्ञान लिया और महत्वाकांक्षी जीएमएलआर परियोजना के प्रस्तावक, बीएमसी को जरूरी संख्या में पेड़ काटने की अनुमति दे दी। बशर्ते कि प्रतिपूरक वनरोपण का कार्य पूरी ईमानदारी से किया जाए। पीठ में जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एन.वी. अंजारिया भी शामिल थे।
पीठ ने मुख्य सचिव के हलफनामे पर भी ध्यान दिया, जिसमें प्रतिपूरक वनरोपण को ‘सरकारी प्रस्ताव’ का हिस्सा बनाया गया था। मुख्य न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि उक्त हलफनामे में दिए गए कथनों को पूरी ईमानदारी से लागू किया जाए। पीठ ने चेतावनी दी कि काटे गए पेड़ों के बदले में पेड़ लगाने (प्रतिपूरक वनरोपण) में किसी भी अधिकारी द्वारा ढिलाई बरती गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, पीठ बीएमसी की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो महत्वाकांक्षी जीएमएलआर परियोजना के लिए जिम्मेदार है, जिसमें पेड़ों की कटाई के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति मांगी गई है। अदालत को 12 हफ्ते बाद रिपोर्ट दें पीठ ने संबंधित अधिकारियों को मुंबई के संजय गांधी पार्क का निरीक्षण करने का निर्देश दिया जहां पेड़ लगाए जाने हैं। पीठ ने बीएमसी और अन्य प्राधिकारियों को 12 सप्ताह के बाद अदालत में एक रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा। पीठ ने कहा कि पेड़ों की कटाई से पहले भी पेड़ लगाने का कार्य किया जा सकता है।

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