पश्चिम बंगाल: मतदान से दो दिन पहले जिनकी अपील मंजूरी होगी, वे डाल सकेंगे वोट- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वे लोग वोट डाल सकते हैं जिनकी मतदाता सूची से नाम हटाने की अपील मतदान से 2 दिन पहले स्वीकार कर ली गई है। कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को संशोधित पूरक मतदाता सूची जारी करने का आदेश दिया है, ताकि योग्य मतदाता चुनाव में हिस्सा ले सकें।

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में वे लोग भी वोट डाल सकते हैं, मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ जिनकी अपील को अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा मतदान से 2 दिन पहले स्वीकार कर ली जाएगी। शीर्ष अदालत ने भारत के निर्वाचन आयोग को इसके लिए संशोधित पूरक मतदाता सूची जारी करने का आदेश दिया है।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने संशोधित पूरक मतदाता सूची में उन वोटरों को शामिल करने का निर्देश दिया है, सूची से नाम हटाने के खिलाफ तय कट-ऑफ तारीखों से पहले अपीलीय न्यायाधिकरणों द्वारा स्वीकार कर ली गई हैं।
पीठ ने कहा कि अपीलों पर विचार करने के बाद, न्यायाधिकरण जिस व्यक्ति को मतदान के लिए योग्य पाया जाता है, उन्हें इस विधानसभा चुनाव में मतदान करने का अधिकार होगा। पीठ ने आयोग को निर्देश दिया है कि जिन अपीलकर्ताओं की अपीलें, वोटर लिस्ट से बाहर किए जाने के खिलाफ, 21 अप्रैल (पहले चरण के लिए) या 27 अप्रैल (दूसरे चरण के लिए) से पहले अपीलीय ट्रिब्यूनलों द्वारा स्वीकार कर ली जाती हैं, उन्हें पूरक मतदाता सूची में शामिल करें। ताकि वे राज्य में पहले चरण में 23 अप्रैल और दूसरे चरण में 29 अप्रैल को होने वाले मतदान में वोट डाल सके।शीर्ष कोर्ट ने कहा कि अगर अपीलीय ट्रिब्यूनल किसी अपील को मंजूर कर लेता है और किसी नाम को शामिल करने या हटाने के लिए कोई पक्का निर्देश जारी करता है, तो पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल या 29 अप्रैल को होने वाली वोटिंग से पहले ऐसे निर्देशों को ठीक से लागू किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए निर्वाचन आयोग को यह निर्देश देते हैं कि जहां भी अपीलीय ट्रिब्यूनल 21 अप्रैल या 27 अप्रैल तक (जैसा भी मामला हो) अपीलों पर फैसला कर लेते हैं, वहां ऐसे अपीलीय आदेशों को एक पूरक संशोधित वोटर लिस्ट जारी करके लागू किया जाएगा और वोट देने के अधिकार से जुड़े सभी ज़रूरी नतीजे सामने आएंगे।’पीठ ने 13 अप्रैल को पारित अपने आदेश, जिसे 16 अप्रैल को अपलोड किया गया, में साफ किया है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के ख़िलाफ सिर्फ अपील दायर करने से ही किसी व्यक्ति को वोट देने का अधिकार नहीं मिल जाएगा। पीठ ने कहा है कि हालांकि, यह कहने की जरूरत नहीं है कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनकी अपीलें अपीलीय ट्रिब्यूनल में सिर्फ लंबित होने से ही उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं मिल जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची को फ्रीज किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर यह आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं ने पीठ से आग्रह किया था कि जिन लोगों की अपीलें न्यायाधिकरण द्वारा मंजूर कर ली जाती है, उन्हें वोट देने की इजाजत दी जाए। चुनाव आयोग ने इससे पहले 9 अप्रैल को पहले चरण के चुनावों के लिए वोटर लिस्ट को फ्रीज दिया था।
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