
दिल्ली एनसीआर में ग्रीन पटाखा को मिली हरी झंडी
प्रभात कुमार नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिवाली के मद्देनजर दिल्ली एनसीआर में
प्रभात कुमार नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिवाली के मद्देनजर दिल्ली एनसीआर में कुछ शर्तों के साथ ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दे दी। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि ग्रीन पटाखे की अनुमति सिर्फ दिवाली से एक दिन पहले और दिवाली वाले दिन सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक ही सीमित रहेगा। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रा की पीठ ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के अपने पिछले आदेश में ढील देते हुए यह फैसला दिया है।

मुख्य न्यायाधीश गवई ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ‘त्योहार मनाने और पर्यावरण की रक्षा के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें परस्पर विरोधी हितों को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा और उत्पन्न होने वाली पर्यावरणीय चिंताओं से समझौता किए बगैर, संयमित रूप से अनुमति देनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की छूट केवल परीक्षण के आधार पर है और यह केवल तय अवधि के लिए ही लागू होगी। पीठ ने दिल्ली सरकार के 14 अक्टूबर, 2024 के उस आदेश का भी संज्ञान लिया, जिसमें पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था और इसके बाद इस अदालत ने पूरे एनसीआर में इसे लागू कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने कहा है कि ‘हालांकि, अब स्थिति अलग है, केंद्र और दिल्ली सरकार, दोनों ही कम से कम त्योहारों के दौरान उक्त प्रतिबंध में ढील देने की मांग कर रही हैं। ऐसे में कुछ शर्तों के साथ सीमित समय के लिए ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दे रहे हैं। शीर्ष अदालत ने फैसले में कहा है कि ‘पिछले छह वर्षों में, हरित पटाखों ने प्रदूषण में काफी कमी की है। साथ ही कहा है कि चूंकि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की व्यापक तस्करी होती है, जिससे हरित पटाखों की तुलना में अधिक नुकसान होता है, इसलिए हम ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दे रहे हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) और राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) द्वारा प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही बेचने और इस्तेमाल करने की अनुमति होगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि बेरियम युक्त पटाखों और नीरी द्वारा ग्रीन पटाखों के रूप में अनुमोदित न किए गए पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी और यदि ये बिक्री के लिए या व्यक्तियों/व्यापारियों के कब्जे में पाए जाते हैं, तो इन्हें तुरंत जब्त कर लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण की मांग को लेकर 40 साल पहले, 1985 में एमसी मेहता द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया है। पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं रहा कारगर सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों की कुछ शर्तों के साथ बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति देते हुए अपने फैसले में कहा है कि पूर्ण प्रतिबंध कारगर नहीं रहा है। पीठ ने कहा है कि पूर्ण प्रतिबंध से वास्तव में पटाखों के उपयोग पर रोक नहीं लग सकी और तस्करी वाले पटाखों का उपयोग बढ़ा है, जो मौजूदा विकसित हरित पटाखों की तुलना में अधिक हानिकारक प्रभाव डालते हैं। शीर्ष अदालत ने कहा है कि 2018 और 2024 (जहां पूर्ण प्रतिबंध था) में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एआईक्यू) में कोई बड़ा अंतर नहीं था। पीठ ने राजस्थान और हरियाणा राज्यों द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं पर भी ध्यान दिया कि प्रतिबंध का उन पर भी प्रभाव पड़ेगा क्योंकि उनके कई जिले एनसीआर में आते हैं। हरियाणा ने कहा कि उसके 22 में से 14 जिले एनसीआर में आते हैं। तय स्थानों पर ही होगी बिक्री सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा है कि राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) की वेबसाइट पर अपलोड किए गए हरित पटाखों की बिक्री 18 से अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर तक ही जारी रहेगी। पीठ ने यह भी साफ कर दिया है कि दिल्ली एनसीआर में सिर्फ तय स्थानों पर ही ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति होगी। इसके लिए सभी जिला कलेक्टरों/आयुक्तों द्वारा जिला पुलिस अधीक्षक के परामर्श से जगह तय करने और इस जगह का व्यापक प्रचार प्रसार करने का आदेश दिया है। निगरानी के लिए गश्ती दल गठित करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अधिकारी, जिला प्रशासन के परामर्श से, ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए तय जगहों पर निगरानी रखने के लिए गश्ती दल गठित करेंगे। निगरानी के लिए गठित होने वाले गश्ती दल में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के क्षेत्रीय कार्यालयों से नामित अधिकारी भी शामिल होंगे। गठित होने वाले गश्ती दल, नीरी की वेबसाइट पर अपलोड किए गए हरित पटाखा उत्पादों और दिए गए पंजीकरणों तथा व्यक्तिगत निर्माताओं को जारी किए गए क्यूआर कोड से स्वयं को परिचित कराएंगे। शीर्ष अदालत ने गश्ती दल को यह सुनिश्चित करने के लिए तय स्थलों की नियमित रूप से जांच करने को कहा कि सिर्फ ग्रीन पटाखे यानी अनुमत उत्पाद ही बेचे जाएं और वह भी जारी किए गए क्यूआर कोड के साथ। अप्रमाणित पटाखा बेचने पर होगी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट ने गश्ती दल को पटाखों के रैंडम नमूने लेने और जांच के लिए पेसो लैब में भेजने को कहा है। साथ ही कहा है कि जांच के पाया जाता है कि अप्रमाणित उत्पाद यानी पटाखे बेचे जा रहे या गए हैं तो उक्त उत्पादों के निर्माण या बिक्री में शामिल लोगों की जिम्मेदारी होगी, जिन्हें न केवल दंडित किया जाएगा, बल्कि पेसो या नीरी द्वारा जारी उनका लाइसेंस/पंजीकरण भी रद्द कर दिया जाएगा। शीर्ष अदालत ने कहा है कि पटाखों की बिक्री केवल लाइसेंस प्राप्त व्यापारियों के माध्यम से ही की जाएगी और उत्पादों, यानी ग्रीन पटाखों का निर्माण उन लोगों द्वारा किया जाएगा जो नीरी में पंजीकृत हैं और पेसो से लाइसेंस प्राप्त हैं। इन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल नहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बोरियम युक्त, पटाखों के साथ-साथ श्रृंखलाबद्ध पटाखों (लारिस) का निर्माण या बिक्री या इस्तेमाल नहीं की जाएगी। प्रमुख दिशा निर्देश - ई-कॉमर्स नेटवर्क के माध्यम से पटाखों की खरीद-बिक्री नहीं की जाएगी और ऐसे उत्पादों की किसी भी आपूर्ति को रोक दिया जाएगा और उत्पाद को जब्त कर लिया जाएगा। - पटाखों पर प्रतिबंध लागू होने के बाद जिन व्यापारियों के लाइसेंस, समाप्त हो गए हैं या रद्द कर दिए गए हैं, उन्हें वैधानिक अधिकारियों द्वारा निर्धारित अवधि के लिए नवीनीकृत किया जाएगा। - केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और एनसीआर के अंतर्गत आने वाले जिलों में उनके संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों के परामर्श से तत्काल प्रभाव से 25 अक्टूबर तक अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक की निगरानी करेगा और इस न्यायालय के समक्ष एक रिपोर्ट दाखिल करेगा। रिपोर्ट में बताए गए प्रत्येक दिन की वायु गुणवत्ता का विवरण देने को कहा है। साथ ही निगरानी के साथ-साथ, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के क्षेत्रीय कार्यालय अधिक उपयोग घनत्व वाले स्थलों से विश्लेषण हेतु रेत और पानी के नमूने भी लेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में माना है कि ‘पटाखों का इस्तेमाल भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक ताने-बाने में गहराई से समाया हुआ है, जिसे अक्सर उत्सवों और शुभ अवसरों पर उत्सव की भावना की एक हर्षोल्लासपूर्ण अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाता है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने फैसले में आगाह किया कि ऐसी परंपराएं उन प्रथाओं को उचित नहीं ठहरा सकतीं जो जन स्वास्थ्य या पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं। पीठ ने कहा है कि व्यावसायिक हित और त्योहारों का उत्सव जन स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी चिंताओं से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हो सकता। पीठ ने कहा कि अनियंत्रित पटाखों का इस्तेमाल जन स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक है, इसलिए हम इसके (पटाखों) के अनियंत्रित इस्तेमाल की अनुमति नहीं दे सकते। फैसले में कहा गया है कि गंभीर स्वास्थ्य खतरों के परिणामस्वरूप होने वाला बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण, जीवन के अधिकार और पेशे को जारी रखने के अधिकार के विरुद्ध है, जो पटाखा उद्योग में लगे व्यक्तियों और उनके कर्मचारियों को प्राप्त है।

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