उत्तर प्रदेश की याचिका पर सुनवाई करेगा शीर्ष कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है, जिसमें हाईकोर्ट के चार आरोपियों को दी गई मौत की सजा और एक अन्य को उम्रकैद निरस्त करने के आदेश को चुनौती दी गई है। यह मामला 2007 में रामपुर सीआरपीएफ शिविर पर हुए आतंकी हमले से संबंधित है।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर बुधवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई। हाईकोर्ट ने 2007 के 'रामपुर सीआरपीएफ शिविर' आतंकी हमला मामले में चार आरोपियों को दी गई मौत की सजा और एक अन्य को दी गई उम्रकैद निरस्त कर दी थी। रामपुर स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) शिविर पर 31 दिसंबर 2007 की रात को हुए हमले में सीआरपीएफ के आठ जवान शहीद हो गए थे और पांच घायल हो गए थे। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राज्य सरकार की याचिका पर आरोपियों को नोटिस जारी किये और मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की।
पांचों आरोपियों की ओर से अधिवक्ता एम. एस. खान पेश हुए। राज्य सरकार ने पिछले साल 29 अक्तूबर को हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश को खारिज कर दिया था, जिसमें इस मामले में चार लोगों को मृत्युदंड और एक अन्य को उम्रकैद दी गई थी। हाईकोर्ट ने मोहम्मद शरीफ, सबाउद्दीन, इमरान शहजाद, मोहम्मद फारूक और जंग बहादुर खान को यह कहकर बरी कर दिया था कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ मुख्य अपराध के मामले को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
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