‘लॉ कॉलेज सिर्फ रहने खाने का ठिकाना बन जाएगा’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कक्षा में कम उपस्थिति होने पर छात्रों को परीक्षा में शामिल होने से नहीं रोका जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि ऐसा किया गया, तो राष्ट्रीय विधि कॉलेज का छात्रावास केवल रहने-खाने की जगह बनकर रह जाएगा। मामले में बीसीआई से जवाब मांगा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि यदि कक्षा में कम उपस्थिति होने पर परीक्षा में शामिल होने से नहीं रोका गया तो नेशनल लॉ कॉलेज का छात्रावास सिर्फ रहने-खाने की जगह बनकर रह जाएगा। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर यह टिप्पणी की है, जिसमें कहा गया कि कक्षा में कम उपस्थिति होने पर कानून के छात्रों को परीक्षा में शामिल होने से नहीं रोका जा सकता। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा कि कम उपस्थिति होने पर परीक्षा में शामिल होने दिया जाए या नहीं, इस मुद्दे पर विस्तार से सुनवाई के बाद ही कोई आदेश पारित करेंगे।
पीठ ने मामले में भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि पहले इस मुद्दे पर विस्तार से सुनवाई करेंगे। जस्टिस मेहता ने कहा कि यदि इस तरह की बात (कक्षा में कम उपस्थिति पर परीक्षा में शामिल होने से नहीं रोकने की बात) मान ली जाए, तो राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों और अन्य महाविद्यालयों के हॉस्टल सिर्फ रहने-खाने की जगह बनकर रह जाएंगे और कुछ नहीं। हाईकोर्ट छात्र की आत्महत्या की घटना से प्रभावित हो गया था, ऐसा लगता है कि असली मुद्दा यही है। जस्टिस नाथ ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले की वजह से अफरा-तफरी मच गई है और यह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के लिए चिंता का विषय बन गया है। छात्र क्लास में नहीं जा रहे हैं। राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय अपनी अच्छी फैकल्टी के लिए जाने जाते हैं। अगर छात्र क्लास में नहीं आएगे, तो इसका क्या फायदा?’ हालांकि हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और कहा कि मामले पर विस्तार से सुनवाई करेंगे। यह मामला 2016 में लॉ के छात्र सुशांत रोहिल्ला की आत्महत्या से जुड़ा था।
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