एम्स में 30 वर्षीय युवक को एक साथ किडनी व पैंक्रियाज का हुआ प्रत्यारोपण

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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एम्स के डॉक्टरों ने 30 वर्षीय युवक की किडनी और पैंक्रियाज का एक साथ प्रत्यारोपण करने में सफलता हासिल की है। युवक मधुमेह टाइप-एक और अंतिम चरण के किडनी रोग से पीड़ित था। सर्जरी के बाद युवक का मधुमेह ठीक हो गया और किडनी भी सही से काम कर रही है।

एम्स में 30 वर्षीय युवक को एक साथ किडनी व पैंक्रियाज का हुआ प्रत्यारोपण

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। एम्स के डॉक्टरों ने 30 वर्षीय युवक की किडनी और पैंक्रियाज (अग्न्याशय) दोनों का एक साथ प्रत्यारोपण करने में सफलता हासिल की है। युवक मधुमेह टाइप-एक और अंतिम चरण के किडनी रोग से पीड़ित था। बीते दिनों एम्स के जनरल सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने युवक का सफल प्रत्यारोपण किया। इसके बाद अब उसे मधुमेह टाइप-एक से छुटकारा मिल गया है और किडनी भी ठीक काम कर रही है। इससे मरीज के स्वास्थ्य में सुधार है। एम्स के डॉक्टर बताते हैं कि अस्पताल में पहली बार 2008 में इस तरह की सर्जरी हुई थी। तब डॉ. संदीप गुलेरिया ने पैंक्रियाज प्रत्यारोपण किया था। बाद में वह एम्स छोड़कर एक निजी अस्पताल में चले गए। इसके बाद एम्स में पैंक्रियाज प्रत्यारोपण का कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ पाया। बताया जा रहा है कि 18 वर्ष में पहली बार एम्स में किडनी के साथ पैंक्रियाज का भी प्रत्यारोपण किया गया। मरीज मूलरूप से हरियाणा का रहने वाला है। वह टाइप एक डायबिटीज से पीड़ित था। इस वजह से उसके पैंक्रियाज से इंसुलिन नहीं बन पा रही थी। इस वजह से शुगर अनियंत्रित रहता था। शुगर को नियंत्रित रखने के लिए उसे इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ रहा था। मधुमेह के कारण उसकी किडनी भी खराब हो गई थी। इस वजह से उसे किडनी प्रत्यारोपण की भी जरूरत थी。

ब्रेन डेड डोनर मिलने पर हुई सर्जरी

बीते माह 14 अप्रैल को पीजीआई रोहतक में ब्रेन डेड डोनर उपलब्ध होने की सूचना एम्स को मिली। इसके बाद एम्स के डॉक्टरों की टीम पीजीआई रोहतक से पैंक्रियाज व किडनी लेकर दिल्ली पहुंची और जनरल सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने सफल सर्जरी की। एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि पहले मरीज की किडनी प्रत्यारोपित की गई। इसके बाद उसे तुरंत पैंक्रियाज लगाया गया। अब पैंक्रियाज ठीक काम करने लगा है। इससे इंसुलिन बनने लगी है। इस वजह से मरीज का शुगर सामान्य हो गया है। साथ किडनी भी ठीक काम कर रही है।

सामान्य प्रश्न

किस अस्पताल में युवक का प्रत्यारोपण किया गया?
युवक का प्रत्यारोपण एम्स में किया गया।
Ranvijay Singh

लेखक के बारे में

Ranvijay Singh

परिचय एवं अनुभव: रणविजय सिंह को पत्रकारिता में करीब 19 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर प्रमुख संवाददाता स्वास्थ्य, दिल्ली मेट्रो, पेयजल और सामाजिक सरोकार की खबरें कवर करते हैं। इन्हें अपराध, अदालत, तिहाड़ जेल, कृषि, खेल, राजनीति, अन्ना आंदोलन, मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय व दिल्ली सरकार को कवर करने का अनुभव है। कोरोना माहामरी, मायापुरी रेडिएशन, निर्भया कांड, लोकसभा, दिल्ली विधानसभा व नगर निगम चुनाव कवर कर चुके हैं। वह करीब एक दशक से अधिक समय से स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर लगातार शोधपरक स्टोरीज लिख रहे हैं। पत्रकारिता के बदलते ट्रेंड्स, डिजिटल कंटेंट व पाठकों की रुचि के अनुरूप अपनी मजबूत पकड़ बनाई है।


करियर का सफर
अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2007 में दैनिक जागरण से की और 18 वर्ष से अधिक समय तक जुड़े रहे। जहां उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियां सीखी और रिपोर्टिंग में अपनी पकड़ मजबूत की और प्रिंट के लिए पत्रकारिता करते हुए दैनिक जागरण डिजिटल प्लेटफार्म के लिए भी कांटेंट तैयार किए। वह पांच अगस्त 2025 को हिन्दुस्तान से जुड़े।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और स्वास्थ्य रिपोर्टिंग
बायोलॉजी से 12वीं करने के बाद स्नातक मानविकी संकाय संकाय से की। बाद मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा करने से विज्ञान, सामाजिक विज्ञान व पत्रकारिता का अनूठा संयोजन मिला।इससे सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों के साथ-साथ मेडिकल बीट पर भी बेहतर तकनीकी समझ विकसित हुई।


विजन
स्वास्थ्य के विषय पर मजबूत पकड़ के साथ पर्यावरण, सामाजिक सरोकार व राजनीति के विषयों की भी गहरी समझ है। उन्होंने कई ओलंपिक खिलाड़ियों, प्रतिष्ठित डॉक्टरों व नेताओं के साक्षात्कार किए हैं। उनका लक्ष्य पाठकों तक प्रमाणित व शोध परक जानकारी पहुंचाना है।


विशेषज्ञता
स्वास्थ्य। पर्यावरण व राजनीतिक खबरों में भी गहरी रुचि।

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