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खुद भी कीटनाशकों के शिकार हो रहे किसान

खुद भी कीटनाशकों के शिकार हो रहे किसान

संक्षेप:

कोलकाता के आईसीएमआर सेंटर फॉर एजिंग एंड मेंटल हेल्थ के अध्ययन में 808 किसानों पर किए गए शोध में पाया गया कि 19% किसान कीटनाशकों के संपर्क में रहने से सोचने-समझने की शक्ति खो रहे हैं। इनमें से 180 किसान विकारों से ग्रस्त हैं, जिनमें संज्ञानात्मक बधिरता, अवसाद और गति विकार शामिल हैं।

Nov 21, 2025 09:28 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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रिपोर्ट - कोलकाता स्थित आईसीएमआर सेंटर फॉर एजिंग एंड मेंटल हेल्थ का अध्ययन - कीटनाशकों के लगातार संपर्क में रहने से 19 फीसदी किसान सोचने-समझने की शक्ति खो रहे 808 किसानों के स्वास्थ्य पर किया गया अध्ययन 180 किसानों को विकारों से ग्रस्त पाया गया 50 साल से अधिक आयु के हैं सभी किसान मदन जैड़ा नई दिल्ली। दूसरों का पेट भरने के लिए किसान की कोशिश रहती है कि वे ज्यादा से ज्यादा अनाज पैदा करें। वे फसलों को कीटों से बचाने के लिए रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन ये रसायन किसानों के लिए ही मुसीबत बन रहे हैं।

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एक अध्ययन के अनुसार कीटनाशकों के संपर्क में रहने के कारण किसानों की सोचने-समझने की क्षमता खत्म हो रही है। वे अवसाद और गति विकारों की चपेट में भी आ रहे हैं। कोलकाता स्थित आईसीएमआर सेंटर फॉर एजिंग एंड मेंटल हेल्थ ने पूर्व वर्द्धमान जिले में किए एक अध्ययन में यह नतीजा निकाला है। इस अध्ययन में 808 किसानों के स्वास्थ्य की विभिन्न पैरामीटर पर दो चरणों में जांच की गई। इसके बाद नतीजा निकाला कि 18.9 फीसदी ग्रामीण किसान संज्ञानात्मक बधिरता (कांग्निटिव इंपेयरमेंट), अवसाद और मूवमेंट डिसऑर्डर (गति विकार) से ग्रस्त पाए गए। शोधकर्ताओं ने 808 किसानों की जांच में 180 को इन विकारों से ग्रस्त पाया। इनमें से 101 लोग कांग्निटिव इंपेयरमेंट, 16 डिप्रेशन, 12 मूवमेंट डिसऑर्डर तथा 52 लोग ऐसे थे, जो कांग्निटिव इंपेयरमेंट और अवसाद दोनों की चपेट में थे। शोधकर्ताओं ने कहा कि इसी आयु वर्ग में शहरी क्षेत्रों में कांग्निटिव इंपेयरमेंट और अवसाद से ग्रस्त लोगों का प्रतिशत 8.8-10 फीसदी के बीच है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में यह बढ़ा हुआ प्रतिशत स्पष्ट रूप से कीटनाशकों के स्वास्थ्य पर प्रभाव को दर्शाता है। शोध में इन्हें किया गया शामिल शोध में उन किसानों को शामिल किया गया, जो कम से कम पांच साल से कीटनाशकों के संपर्क में थे या उससे जुड़ा काम कर रहे थे। इन किसानों की उम्र 50 साल से अधिक है। क्या है संज्ञानात्मक बधिरता कांग्निटिव इंपेयरमेंट जिसे हिंदी में संज्ञानात्मक बधिरता कहते हैं, एक ऐसी बीमारी है जिसमें सोचने-समझने की क्षमता धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। ध्यान केंद्रित नहीं हो पाता है तथा निर्णय लेने में भी दिक्कत होती है। वहीं, मूवमेंट डिसऑर्डर तंत्रिका तंतु से जुड़ी बीमारी है, जिसमें शरीर पर नियंत्रण से जुड़ी दिक्कतें पैदा होती हैं। अवसाद मानसिक विकार है। यह शोध हालांकि पश्चिम बंगाल के एक जिले के किसानों पर हुआ है लेकिन पूरे देश में हालात करीब-करीब एक जैसे हो सकते हैं। क्योंकि ज्यादा उपज के लिए खेतों में कीटनाशकों का उपयोग साल दर साल बढ़ रहा है। बता दें कि देश की 54 फीसदी कामगार खेती-किसानी में संलग्न हैं।