सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशु बन रहे हादसे की वजह
नई दिल्ली में लावारिस पशुओं के कारण हादसे बढ़ रहे हैं। लोग नगर निगम की निष्क्रियता पर सवाल उठा रहे हैं। डेयरी मालिक गायों को खुला छोड़ देते हैं, जिससे सड़कों पर भीड़ बढ़ती है। पिछले चार महीने में नगर निगम ने 300 से अधिक लावारिस गायों को गौशालाओं में भेजा है।

नई दिल्ली, वरिष्ठ संवाददाता। राजधानी में लावारिस पशुओं के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। सड़कों और कूड़े के ढेर पर डेरा डाले ये लावारिस पशु जाम का कारण भी बन रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद नगर निगम कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। सड़कों से लावारिस पशुओं को हटाने के दावों के बावजूद डेयरियों का संचालन करने वालों पर सख्ती नहीं की जा रही है। कई कॉलोनियों के नागरिक भी इन लावारिस पशुओं से परेशान हैं। उनका कहना है कि डेयरी मालिक गायों को खुला छोड़ देते हैं। जिससे वे भोजन की तलाश में सड़कों और कूड़े के ढेर पर भटकती रहती हैं।
इस कारण आए दिन हादसे होते हैं। कॉलोनी के लोगों ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। राज्य सरकार के वन एवं पशुपालन विभाग के चार साल पहले के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में 80 हजार से अधिक लावारिस और डेयरियों में रखी गई गाय हैं। अभियान चलाया जा रहा नगर निगम प्रशासन के मुताबिक, सड़कों पर घूमने वाली लावारिस गायों और अवैध डेयरियों के संचालन के खिलाफ अभियान शुरू किया गया है। बीते चार महीने में तीन सौ से अधिक लावारिस गायों को पकड़कर गौशालाओं में पहुंचाया गया है। इस मामले को लेकर लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। चार गौशालाओं में भेजे जा रहीं गाय सड़कों से गायों को पकड़ने के बाद नगर निगम उन्हें चार गौशालाओं में पहुंचाता है। अभी नजफगढ़ के सुरहेड़ा में स्थित गौशाला की क्षमता चार हजार गायों को रखने की है। वहीं, रेवला खानपुर में स्थित गौशाला की क्षमता 500, नरेला में हरेवली में मौजूद गौशाला की क्षमता 3200 और सुल्तानपुर डबास गौशाला की क्षमता 7600 गायों की है। दिल्ली में चारों गौशालाओं की क्षमता कुल 15 हजार 300 गायों की है।
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