श्रीलंका में यौन हिंसा पीड़ितों को नहीं मिला न्याय : संरा रिपोर्ट
श्रीलंका में दशकों तक चले गृहयुद्ध के दौरान तमिल नागरिकों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा यौन हिंसा का मुद्दा आज भी अनसुलझा है। 2009 में युद्ध समाप्त होने के बाद भी पीड़ितों को न्याय नहीं मिल रहा। यूएन रिपोर्ट ने सुरक्षा बलों से इस पर सार्वजनिक माफी मांगने की अपील की है।

कोलंबो, एजेंसी। श्रीलंका में दशकों तक चले गृहयुद्ध के दौरान तमिल नागरिकों के खिलाफ मुख्य रूप से सुरक्षा बलों द्वारा की गई यौन हिंसा का मुद्दा आज भी अनसुलझा है। युद्ध समाप्त होने के 17 साल बाद भी पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने यह रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गृहयुद्ध के दौरान व्यापक रूप से यौन हिंसा की गई, मुख्य रूप से देश के सुरक्षा बलों द्वारा। इसे संघर्ष प्रभावित आबादी को डराने, दंडित करने और उन पर नियंत्रण रखने का जरिया बनाया गया।
इसमें कहा गया है कि इन कृत्यों में मुख्य रूप से तमिल नागरिकों और एलटीटीई के वास्तविक या संदिग्ध सदस्यों को निशाना बनाया गया था, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2009 में समाप्त हुए इस संघर्ष के कई पीड़ित आज भी गंभीर शारीरिक चोटों, बांझपन, मानसिक विकारों और आत्महत्या जैसे विचारों से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट में श्रीलंका सरकार से देश के सुरक्षा बलों और अन्य लोगों द्वारा अतीत में की गई यौन हिंसा को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने और औपचारिक रूप से माफी मांगने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने का आह्वान किया गया।
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