सत्ता और पद तभी सार्थक हैं जब वे सेवा और करुणा से जुड़े हों:विजेंद्र गुप्ता
नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता सत्ता और पद तभी सार्थक हैं जब वे सेवा

नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता सत्ता और पद तभी सार्थक हैं जब वे सेवा और करुणा से जुड़े हों। इस पंचकल्याणक महामहोत्सव का साक्षी होना केवल एक धार्मिक अनुभव नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक शांति का मार्ग है। उक्त बातें दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने रविवार को जैन तीर्थ वीरोदय, निर्माण विहार, दिल्ली में प्रथम विश्वकर्मा तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य आयोजित एक विशाल आध्यात्मिक सभा को संबोधित करते हुए कहीं। प्रथम तीर्थंकर की आध्यात्मिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) ने ही विश्व को सभ्यता, श्रम और कर्तव्य का पहला पाठ पढ़ाया था।
आज इस प्राण प्रतिष्ठा के माध्यम से हम उन शाश्वत मूल्यों को अपने जीवन में पुनर्जीवित कर रहे हैं। जैन समाज ने अपनी सादगी और अहिंसा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है।
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