संघर्ष में सैटेलाइट बन रहे सबसे बड़े हथियार
आज के समय में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं बल्कि अंतरिक्ष में भी लड़े जा रहे हैं। सैन्य सैटेलाइट्स ने युद्ध के मैदान को पारदर्शी बना दिया है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव में अंतरिक्ष तकनीक एक बड़ा हथियार बन गई है। सटीक जासूसी और मिसाइल हमलों के लिए सैटेलाइट अब देशों की रीढ़ बन चुके हैं।

अंतरिक्ष तकनीक जीत-हार का अहम हिस्सा बन गई है सैन्य सैटेलाइट जमीन पर 10 सेंटीमीटर तक की छोटी चीज को भी साफ देख सकते हैंजासूसी उपग्रह 27,000 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ते हैं और हर 90 मिनट में धरती का चक्कर लगाते हैंकैलिफोर्निया, एजेंसी। आज के दौर में युद्ध केवल सीमाओं पर टैंकों या सैनिकों से नहीं लड़े जा रहे, बल्कि धरती से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में भी एक बड़ा संघर्ष चल रहा है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव में अंतरिक्ष तकनीक सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरी है। सैटेलाइट और नेविगेशन सिस्टम अब तय कर रहे हैं कि हमला कहां होगा और कौन बचेगा।अमेरिकी
रक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पारंपरिक बमबारी शुरू करने से पहले ही उन्होंने ईरान के 'सैन्य अंतरिक्ष कमान' को निशाना बनाया था। इसे 'फर्स्ट मूवर' रणनीति कहा जाता है। इसका मकसद ईरान के संचार और जासूसी नेटवर्क को जाम करना था, ताकि वह अपनी जवाबी कार्रवाई का तालमेल न बिठा सके। आजकल के आधुनिक कमर्शियल सैटेलाइट ने युद्ध के मैदान को पारदर्शी बना दिया है। उच्च-क्षमता वाली तस्वीरों की मदद से अब पत्रकार और विश्लेषक भी कुछ ही घंटों में यह देख सकते हैं कि किस सैन्य अड्डे पर मिसाइल गिरी और कहां सैनिकों की आवाजाही हो रही है। इसी कारण कई सैटेलाइट कंपनियों ने अब संवेदनशील इलाकों की तस्वीरें दिखाना बंद कर दिया है, ताकि इनका सैन्य दुरुपयोग न हो।ईरान के पास अपने 'नूर' और 'खय्याम' जैसे सैटेलाइट तो हैं, लेकिन बड़ी शक्तियों के मुकाबले उसकी क्षमता सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अपनी कमियों को दूर करने के लिए रूस जैसे सहयोगियों से सैटेलाइट डाटा ले रहा है। वहीं, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का दावा है कि मध्य-पूर्व के कुछ सैन्य ठिकाने गुप्त रूप से ईरान की मदद कर रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि मध्य-पूर्व के कुछ ठिकानों की चीनी सैटेलाइट तस्वीरें ईरान को मदद पहुंचा रही हैं।इजरायल ने भी स्पष्ट किया है कि उसके निशाने पर ईरान के मिसाइल कार्यक्रमों के साथ-साथ उनके सैटेलाइट बुनियादी ढांचे भी हैं। इजराइल का मानना है कि अंतरिक्ष से मिलने वाली खुफिया जानकारी को नष्ट करना दुश्मन को 'अंधा' करने जैसा है। यह घर्ष यह साफ करता है कि अब जीत उसी की होगी जिसका अंतरिक्ष पर नियंत्रण होगा। जासूसी, सटीक मिसाइल हमले और सुरक्षित संचार के लिए सैटेलाइट अब किसी भी देश की 'रीढ़ की हड्डी' बन चुके हैं।बॉक्स -किसके पास कितनी ताकतविशेषता अमेरिका इजरायल ईरानमुख्य क्षमता वैश्विक निगरानी और नेविगेशन सटीक जासूसी और डिफेंस क्षेत्रीय टोही और ड्रोन गाइडेंसडाटा का स्रोत अपना खुद का विशाल नेटवर्क उन्नत स्वदेशी सैटेलाइट सीमित स्वदेशी और रूसी सहायतामुख्य उद्देश्य वर्चस्व बढ़ाना और संपर्क काटना सुरक्षा और सटीक हमले निगरानी और जवाबी कार्रवाईग्राफिक्स -तीन देशों के डिजिटल जाल में फंसा युद्धनीला जाल (अमेरिका) : पूरी दुनिया को कवर कर रहा हैसफेद जाल (इजरायल) : ईरान के ऊपर बहुत ही बारीक और तीखी नजर रखे हुए हैहरा जाल (ईरान) : अपने क्षेत्र में विरोधियों के सिग्नल को जाम करने की कोशिश कर रहा है
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