सोशल मीडिया के खिलाफ अमेरिका की शीर्ष कोर्ट सुनेगी अभिभावकों का दर्द
सोशल मीडिया कंपनियां, जैसे मेटा, टिकटॉक, स्नैप, गूगल और यू-ट्यूब, पहली बार अदालत में युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर आरोपों का सामना करेंगी। अभिभावकों ने इन कंपनियों पर बच्चों को लती बनाने और आत्महत्या की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। अगले छह हफ्ते महत्वपूर्ण होंगे, जहां कंपनियों की सुरक्षा उपायों पर चर्चा होगी।

वाशिंगटन, एजेंसी। सोशल मीडिया कंपनियों पर आरोप लगते रहे हैं कि ये युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को खराब कर रही हैं, लेकिन कंपनियां इसको नकारती रही है। अब पहली बार कंपनियां इन आरोपों के लिए अदालत में खड़ी होंगी। अमेरिका के लॉस एंजिल्स स्थित शीर्ष कोर्ट में इस मसले पर सुनवाई होगी और अदालत अभिभावकों का दर्द सुनेगी। अमेरिका के कैलिफोर्निया के रहने वाले 19 वर्षीय केजीएम की मां करेन ग्लेन ने मेटा, टिकटॉक, स्नैप, गूगल और यू-ट्यूब पर कोर्ट में आरोप लगाया है कि कंपनियां ऐसी सामग्री तैयार कर रहीं जो बच्चों में लती बना रही हैं। इसका सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा।
इसके अलावा वे खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या की कोशिश करने को मजबूर होते हैं। अभिभावक, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और समाज के दूसरे लोग वर्षों से कह रहे हैं कि सोशल मीडिया स्क्रॉल करने की आदत से बच्चों की नींद प्रभावित हो रही, बुलिंग का शिकार हो रहे और उनके भीतर विश्वास कम हो रहा। कंपनियों ने इन आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया। अभिभावकों की आवाज संसद पहुंची तो कंपनियों ने उन परिवारों से माफी मांग ली जिन्होंने कहा कि उनके बच्चे सोशल मीडिया कंपनियों की वजह से अपनी जान गंवा बैठे, लेकिन कुछ ठोस करने की कोशिश नहीं की। टिकटॉक ने शुरू किया समझौता टिकटॉक ने कोर्ट में मामले का ट्रायल शुरू होने से पहले ही समझौता करने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। वहीं स्नैप भी इस मामले में समझौता कर लिया है। अधिवक्ता मार्क लेनियर का कहना है कि पहले से लंबित इस तरह के एक हजार मामले खुल सकते हैं। दूसरी कंपनियों के लिए सबक होगा लेनियर ये भी कहा कि केजीएम मामले में टिकटॉक और स्नैप ने ट्रायल शुरू होने से पहले जिस तरह से गुप्त समझौता किया है वो दूसरी कंपनियों के लिए भी सबक हेगा। संभावना है कि इस मामले में मेटा, टिकटॉक और यू-ट्यूब कटघरे में खड़े हो सकते हैं। अगले छह सप्ताह बेहद अहम अभिभावकों की लड़ाई के अदालत में पहुंचने के बाद अगले छह हफ्ते अहम हैं। एनजीओ हीट इनीशिएटिव के सीईओ सारा गार्डनर का कहना है कि पहली बार अभिभावकों का दर्द अदालत सुनेगी। पूरा सच सामने आएगा कि कैसे कंपनियां बच्चे इसके लती बनाने में जुटी हैं। मां की हर कोशिश नाकाम केजीएम ने दस साल की उम्र में सोशल मीडिया का इस्तेमाल शुरू कि किया। मां ने ऐप को ब्लॉक करने के लिए थर्ड पार्टी ऐप का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद केजीएम ऐप इस्तेमाल करता रहा क्योंकि ऐप अभिभावकों द्वारा लगाई गई हर बंदिश को तोड़ने का गुर सिखाते हैं। कंपनियां निरंतर सुधार में जुटीं सोशल मीडिया कंपनियां टिकटॉक, मेटा, यू-ट्यूब और स्नैप आरोपों के आधार पर सुरक्षा चक्र को मजबूत बनाने में जुटी हैं। सोशल मीडिया कंपनियां ऐप पर अभिभावकों का नियंत्रण बढ़ाने के उपाय कर रही हैं जिससे युवाओं को भविष्य के खतरों से बचाया जा सके। सोशल मीडिया एक गंभीर समस्या बच्चों में सोशल मीडिया की लत उनकी कौशल क्षमता को प्रभावित कर रही। यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना की रिपोर्ट के अनुसार सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल के चलते बच्चों की सोचने, समझने और तार्किक शक्ति पर बुरा असर पड़ रहा। नौ से दस साल के छह हजार बच्चों पर हुए शोध के बाद ये दावा किया गया । इसी तरह स्टैनफोर्ड स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोध के अनुसार सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण बच्चों में चिड़चिड़ापन, घबराहट, बेचैनी और गुस्से जैसा लक्षण देखने को मिल रहा। प्यू रिसर्च के एक सर्वेक्षण में 48 फीसदी किशोरों ने खुद स्वीकार किया था कि सोशल मीडिया का उनपर नकारात्मक असर पड़ता है। इसके बावजूद वे खुद को इसका इस्तेमाल करने से नहीं रोक पाते हैं।

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