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47 फीसदी डॉक्टरों को हाई बीपी, 23 फीसदी को शुगर

47 फीसदी डॉक्टरों को हाई बीपी, 23 फीसदी को शुगर

संक्षेप:

एक अध्ययन में पता चला है कि भारत के 265 डॉक्टरों में से 48% उच्च रक्तचाप और 23% मधुमेह के मरीज हैं। अध्ययन के अनुसार, 21.5% डॉक्टरों को थायराइड और 43% का एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ पाया गया। शोधकर्ताओं ने सरकार को डॉक्टरों की स्वास्थ्य देखभाल के लिए उपाय सुझाए हैं।

Dec 17, 2025 01:26 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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भारत के डाक्टरों पर बड़ा खुलासा, हर दूसरे डाक्टर को हाई बीपी, हर चौथा डायबिटिक - देश के सात राज्यों के 265 लाइसेंस प्राप्त डाक्टर आनलाइन अध्ययन में हुए थे शामिल - 21.5 फीसदी को थायराइड, 11.7 को ह्रदय रोग, 43 का हाई एलडीएल कोलेस्ट्रोल बढ़ा - 30.2 फीसदी डाक्टर कभी-कभार पीते हैं शराब, जबकि 4.9 फीसदी रोज करते धूम्रपान आगरा, वरिष्ठ संवाददाता/ पवन तिवारी। लोगों के स्वास्थ्य की रखवाली करने वाले डाक्टर खुद बीमारियों के शिकंजे में हैं। देश के चिकित्सकों पर हुए एक अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक 48 फीसदी डाक्टर हाई ब्लड प्रैशर (हायपरटेंशन) से पीड़ित पाए गए हैं, जबकि 23 फीसदी मधुमेह के मरीज हैं।

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जर्नल आफ मिड हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन ने भारतीय चिकित्सा जगत को चौंका देने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। यह अध्ययन मार्च से जून 2025 के बीच देशभर के 265 डाक्टरों पर किया गया। इसमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार और गुजरात के चिकित्सक आनलाइन शामिल हुए। नतीजों में पाया गया कि 47.9 फीसदी डाक्टरों को हायपरटेंशन (हाई बीपी) है। इनमें से केवल 63 फीसदी का बीपी नियंत्रित है, जबकि 23 फीसदी डाक्टर शुगर से पीड़ित निकले। इसी तरह 21.5 फीसदी को थायराइड, 43 फीसदी में एलडीएल कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ मिला और 11.7 फीसदी डाक्टरों ह्रदय रोग के मरीज पाए गए। अध्ययन के मुख्य अन्वेषक एसएन मेडिकल कालेज आगरा के प्रोफेसर आफ मेडिसिन डा. प्रभात अग्रवाल हैं। स्कूल आफ ट्रोपिकल मेडिसिन कोलकाता (पं. बंगाल), डायबिटीज एंड हार्ट रिसर्च सेंटर धनबाद, झारखंड ने सहयोग किया है। अध्ययन तैयार करने में डा. शंभू सम्राट समाजदार, डा. नागेंद्र कुमार सिंह, डा. शताविसा मुखर्जी, डा. संदीप्ता कुमार पांडा, डा. रुचिका गर्ग, डा. निखिल पुरसनानी, डा. गौरव गुप्ता का सहयोग रहा। खराब जीवन शैली है जिम्मेदार - काम के लंबे घंटे, नाइट शिफ्ट, मानसिक तनाव, नींद की कमी की सीधा असर डाक्टरों की सेहत पर पड़ रहा है। शोधकर्ताओं ने इसके लिए सरकार को समाधान भी सुझाए हैं। इनके मुताबिक सालाना चेकअप अनिवार्य करना, वर्कप्लेस वेलनेस प्रोग्राम, मानसिक स्वास्थ्य रिपोर्ट, सेल्फ केयर को जिम्मेदारी बनाई जाए। क्योंकि डाक्टर अस्वस्थ होंगे तो स्वास्थ्य का नेटवर्क कमजोर हो जाएगा। यह व्यक्तिगत नहीं राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है। बॉक्स - 1 बीमारियां और डाक्टर ---------------------------------- हाई ब्लड प्रैशर:- 127 (47.9) फीसदी डायबिटीज:- 61 (23) फीसदी थायराइड:- 57 (21.5) फीसदी एलडीएल कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ:- 114 (43) फीसदी ह्रदय के रोग:- 31 (11.7) फीसदी बॉक्स - 2 काम के अनिश्चित घंटे, तनाव, बिगड़े खानपान, पर्याप्त नींद न मिलने के कारण डाक्टर खुद हाई रिस्क जोन में हैं। इसमें सरकारी और निजी प्रैक्टिस करने वाले दोनों ही शामिल हैं। सरकार को इनकी सेहत के लिए कोई ठोस गाइडलाइन जारी करनी चाहिए। समाज की सेहत की रखवाली करने वाले ही बीमार होंगे तो इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। डा. प्रभात अग्रवाल, प्रोफेसर आफ मेडिसिन, एसएन मेडिकल कालेज, आगरा