शिवाजी महाराज न होते तो इतिहास अलग होता : फडणवीस
पुणे में छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनके नेतृत्व की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यदि शिवाजी महाराज नहीं होते, तो इतिहास अलग होता। समारोह में बड़ी संख्या में लोग जुटे और फडणवीस ने उनकी विरासत को मान्यता देने की बात की।

- मराठी योद्धा की 396वीं जयंती के उपलक्ष्य में एक सभा को संबोधित किया पुणे, एजेंसी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को स्वराज्य की स्थापना में छत्रपति शिवाजी महाराज के दूरदर्शी नेतृत्व की प्रशंसा की। साथ ही कहा कि यदि वे नहीं होते, तो इतिहास अलग होता। फडणवीस ने पुणे जिले के शिवनेरी किले में मराठी योद्धा की 396वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह के दौरान एक सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के किले विरासत स्थल हैं। अब दुनिया इस तथ्य को मान्यता देती है। मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्रियों एकनाथ शिंदे एवं सुनेत्रा पवार ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उन्हें पुणे स्थित शिवनेरी किले में श्रद्धांजलि दी।
छत्रपति शिवाजी महाराज के जयंती समारोह में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग किले में एकत्र हुए। फडणवीस ने इस अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि छत्रपति शिवाजी महाराज का आशीर्वाद एवं प्रेरणा राज्य के लोगों का मार्गदर्शन करती रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिवाजी महाराज ऐसे पहले शासक थे जिन्होंने यह समझा कि शत्रु कहां से आ सकता है और समुद्री मार्ग से आ सकने वाले खतरों को भांपते हुए उन्होंने राज्य की सुरक्षा के लिए समुद्री किले बनवाए थे। बता दें कि मराठा साम्राज्य के संस्थापक शिवाजी महाराज का जन्म 1630 में पुणे जिले के शिवनेरी में हुआ था। अजित पवार को याद किया मुख्यमंत्री ने विमान हादसे में जान गंवाने वाले उपमुख्यमंत्री अजित पवार को याद करते हुए कहा कि उन्हें शिवनेरी किले से गहरा लगाव था। फडणवीस ने कहा कि मैंने उन्हें वचन दिया था कि महाराष्ट्र के किलों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।
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