शासन राज्य और जनता के बीच एक नैतिक अनुबंध : शशि थरूर
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि शासन राज्य और जनता के बीच नैतिक अनुबंध है। उन्होंने पारदर्शिता और कानून के राज पर जोर दिया, साथ ही शासन को गरिमा और विश्वास पर आधारित नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखने की आवश्यकता बताई। थरूर ने डिजिटलीकरण को सुधार का विकल्प मानने से भी चेतावनी दी।

नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने बुधवार को कहा कि शासन राज्य और जनता के बीच एक नैतिक अनुबंध है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पारदर्शिता और कानून का राज कुशलता और सहानुभूति के साथ चलना चाहिए। थरूर पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी के एक वर्चुअल सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संस्थानों को शासन को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि गरिमा, विश्वास और साहस पर आधारित नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखना चाहिए। कार्यक्रम में ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड के सदस्य, विभिन्न क्षेत्रीय और जोनल कार्यालयों के अधिकारी तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल हुए।
थरूर ने कहा कि शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही, सहभागिता और विधि का शासन अनिवार्य तत्व हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि डिजिटलीकरण को सुधार का पर्याय नहीं माना जाना चाहिए।
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