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जीएनसीटीडी कानून में संशोधन को रद्द करने की मांग

हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीNewswrap
Tue, 18 May 2021 06:30 PM
जीएनसीटीडी कानून में संशोधन को रद्द करने की मांग

नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता

उपराज्यपाल की शक्तियां बढ़ाने वाले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) संशोधित कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। न्यायालय में दाखिल याचिका में केंद्र सरकार द्वारा जारी इस संशोधित कानून को रद्द करने की मांग की गई है।

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और उपराज्यपाल कार्यालय को नोटिस जारी जवाब मांगा है। पीठ ने एक अधिवक्ता की ओर से दाखिल याचिका पर यह आदेश दिया है। इससे पहले दिल्ली सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता संतोष त्रिपाठी ने इस याचिका का तकनीकी पहलुओं पर विरोध किया। त्रिपाठी ने पीठ से कहा कि याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसमें दिल्ली की चुनी हुई सरकार को पक्षकार नहीं बनाया गया है। उन्होंने याचिका को आधारहीन बताते हुए इसे खारिज करने की मांग की है। पीठ ने यह आदेश विश्वनाथ अग्रवाल की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि केंद्र द्वारा संशोधित कानून से लोगों में इस बात को लेकर भ्रम फैलेगा कि राजधानी में निर्णय कौन लेगा, उपराज्यपाल या चुनी हुई सरकार। इसके साथ ही यह भी कहा है कि उपराज्यपाल की शक्ति बढ़ाना लोकतांत्रिक सरकार के लिए उचित नहीं है। याचिका में 27 अप्रैल को केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए संशोधित कानून को रद्द करने की मांग की गई है। इससे पहले भी उच्च न्यायालय ने इस कानून को रद्द करने की मांग पर केंद्रीय गृह मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय से जवाब मांगा था। अब दोनों याचिका पर उच्च न्यायालय में 4 जून को एक साथ सुनवाई होगी। इससे पहले पीठ ने सभी पक्षकारों को अपना जवाब देने को कहा है।

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