राजेश एक्सपोर्ट्स ने राजस्व बढ़ाकर दिखाया : सेबी
नई दिल्ली, एजेंसी। सोना रिफाइनिंग और आभूषण विनिर्माण कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड पर सेबी ने 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक राजस्व बढ़ाने का आरोप लगाया है। कंपनी ने अपने राजस्व का बड़ा हिस्सा विदेशी कंपनियों से जोड़कर दिखाया, जिसे सेबी ने असंगत और अविश्वसनीय बताया।

नई दिल्ली, एजेंसी। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने सोना रिफाइनिंग एवं आभूषण विनिर्माण से जुड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल) पर वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का एकीकृत राजस्व बढ़ाकर दिखाने का आरोप लगाया है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की तरफ से जारी अंतरिम आदेश के मुताबिक, कंपनी ने अपने अधिकांश राजस्व को अपनी विदेशी अनुषंगी कंपनियों, खासकर स्विट्जरलैंड स्थित वलकैम्बी एसए से जोड़कर दिखाया, जबकि इस इकाई के एकल आधार पर वित्तीय विवरण में राजस्व का केवल एक छोटा हिस्सा ही दर्ज है।
सेबी के अनुसार आरईएल का राजस्व
सेबी के मुताबिक, आरईएल ने 2020-21 से लेकर 2024-25 की अवधि में अपना एकीकृत राजस्व करीब 15.18 लाख करोड़ रुपये दिखाया। इसमें से 15.15 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 99.8 प्रतिशत राशि अनुषंगी कंपनियों से जुड़ी बताई गई। लेकिन इन आंकड़ों का मिलान समूह की प्रमुख अनुषंगी वलकैम्बी एसए के ऑडिटेड खातों से नहीं हो पाया।
वलकैम्बी का राजस्व और विश्लेषण
बाजार नियामक ने कहा कि वलकैम्बी अपने खातों में केवल प्रसंस्करण शुल्क या मूल्यवर्धन को ही राजस्व के रूप में दर्ज करती है, जबकि आरईएल और इसकी मध्यस्थ मूल कंपनी ग्लोबल गोल्ड रिफाइनरीज (जीजीआर) ने सोने के लेनदेन के कुल मूल्य को राजस्व के रूप में दिखाया।
असंगत वित्तीय विवरण
उदाहरण के तौर पर, कैलेंडर वर्ष 2023 में वलकैम्बी का एकल आधार पर राजस्व करीब 543 करोड़ रुपये रहा, जबकि जीजीआर एवं आरईएल ने क्रमशः करीब 2.93 लाख करोड़ एवं 2.81 लाख करोड़ रुपये का राजस्व दिखाया। इसका नतीजा यह हुआ कि वलकैम्बी का एकल राजस्व, एकीकृत राजस्व के 0.5 प्रतिशत से भी कम रहा।
सवाल उठाना
राजस्व आंकड़े को असंगत और अविश्वसनीय बताया
सेबी ने यह सवाल उठाया कि बिना किसी स्वतंत्र परिचालन गतिविधि वाली एक होल्डिंग कंपनी कई लाख करोड़ रुपये के सकल लेनदेन मूल्य को राजस्व के रूप में किस तरह दर्ज कर सकती है, जबकि परिचालन अनुषंगी कंपनी खुद ही केवल प्रसंस्करण शुल्क को राजस्व के रूप में मान्यता देती है। इस विसंगति के बारे में पूछे जाने पर राजेश एक्सपोर्ट्स ने कहा कि वलकैम्बी एसए केवल प्रसंस्करण आय को दर्ज करती है, जबकि जीजीआर प्रसंस्करण शुल्क के साथ सोने के लेनदेन के सकल मूल्य को राजस्व के रूप में मान्यता देती है। सेबी ने कंपनी की इस विश्लेषण को प्रथम दृष्टया असंगत और व्यावसायिक रूप से अविश्वसनीय बताया। नियामक ने कहा कि आरईएल होल्डिंग कंपनी के स्तर पर सकल लेनदेन मूल्य को राजस्व के रूप में दिखाने के समर्थन में जरूरी दस्तावेज, लेखा राय, प्रमुख-एजेंट आकलन, बुलियन स्वामित्व रिकॉर्ड, स्टॉक जोखिम का ब्योरा, अंतर-कंपनी समझौते या मिलान विवरण पेश नहीं कर सकी।
प्रमुख प्रश्न
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


