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3 दिसंबर, 2020|4:22|IST

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शिकंजा : फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंकों से कर्ज लेने वाला शातिर पकड़ा

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- निजी क्षेत्र के बैंकों को 97 लाख रुपये का लगा चुका है चूना

- कंपनी के कर्मचारियों के नाम पर भी ले रखा है लोन

नई दिल्ली। वरिष्ठ संवाददाता

पहाड़गंज पुलिस ने फर्जी कंपनियां बनाकर निजी क्षेत्र के बैंकों से लोन लेकर 97 लाख रुपये की ठगी करने वाले शातिर ठग को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान प्रदीप उर्फ राजेश के तौर पर हुई है। पुलिस ने आरोपी से तीन कार बरामद की है।

डीसीपी संजय भाटिया ने बताया कि पहाड़गंज थाने में निजी क्षेत्र के बैंक ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर 20 सितंबर को मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत के अनुसार, यूएआई सर्विसेज एवं माइंडट्री नाम की दो कंपनियों के कर्मचारियों ने बैंक से लोन और क्रेडिट कार्ड लिए थे, लेकिन जांच में पाया गया कि कंपनी के कागजात फर्जी थे और मालिक की भी पहचान गलत थी। दोनों कंपनियों में एक ही मोबाइल नंबर का प्रयोग किया गया था।

फुटेज एवं टेक्निकल सर्विलांस से सुराग

डीसीपी ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए एसएचओ पहाड़गंज वीएन झा के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। पुलिस ने मोबाइल नंबर के आधार पर जांच शुरू की तो संगतराशन चौकी प्रभारी एसआई गोपाल को आरोपी राजेश उर्फ प्रदीप का सुराग मिल। जब पुलिस नोएडा एक्सटेंशन स्थित अपार्टमेंट में पहुंची तो आरोपी वेंटिलेशन पाइप से भागने की कोशिश करने लगा लेकिन एसआई गोपाल ने उसे पकड़ लिया।

बिल्डर से बना ठग

पूछताछ में मालूम हुआ कि प्रदीप पहले बिल्डर था लेकिन नोटबंदी में उसे काफी नुकसान हो गया। इसी बीच उसे किसी ने बैंक से फर्जी कागजों पर लोन लेकर ठगी करने की सलाह दी। उसने राजेश और प्रदीप के नाम पर दो कंपनियां बनाई और कर्मचारी रखे। फिर इन कर्मचारियों के नाम पर लोन लिया और गारंटी के तौर पर कंपनी द्वारा जारी सैलरी स्लिप जमा किया। लोन के रुपये को वह कंपनी के खाते में जमा करा देता था। प्रदीप ने खुद भी कार लोन और क्रेडिट कार्ड लिया था। जांच में कुल 97 लाख की ठगी की बात सामने आई है। पुलिस ने तीन कार भी बरामद की है।

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लोन के नाम पर डॉक्टर से सवा चार करोड़ की ठगी में युवक गिरफ्तार

नई दिल्ली। वरिष्ठ संवाददाता

आर्थिक अपराध शाखा ने डॉक्टर से लोन दिलाने के बहाने सवार चार करोड़ रुपये की ठगी के मामले में सोमवार को आरोपी आशीष को गिरफ्तार किया है। इस मामले में आशीष का पिता संजय सक्सेना पहले ही गिरफ्तार हो चुका है।

जानकारी के अनुसार, मेडिकल उपकरणों से जुड़ी फर्म के निदेशक डॉक्टर प्रशांत सरीन ने इस बाबत शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया कि 2018 में संजय सक्सेना से भेंट हुई। उसने बताया कि वह सोने एवं हीरे आदि का कारोबार करता है और कंपनियों को लोन देता है। इस पर पीड़ित ने 75 करोड़ रुपये का लोन दिलाने का अनुरोध किया। आरोपी ने आठ फीसदी ब्याज दर के हिसाब से आरोपी ने लोन दिलाने का वादा किया। लेकिन प्रोसेसिंग शुल्क के नाम पर सवा चार करोड़ रुपये वसूल लिए। जब पीड़ित को ठगे जाने का अहसास हुआ तो आर्थिक अपराध शाखा में अगस्त माह में एफआईआर दर्ज कराई जिसके आधार पर पुलिस ने संजय को सितंबर माह में जयपुर से गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन जांच में उसके बेटे आशीष की भूमिका सामने आई। ठगी के रुपये आशीष के भी खाते में जमा किए गए थे जिसके बाद पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया।

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  • Web Title:Screws Vicious borrower from banks caught in the name of fake companies