Hindi NewsNcr NewsDelhi NewsScientists in Europe Develop Sustainable Aviation Fuel from Tomato Waste
टमाटर के कचरे से तेल की जरूरतें पूरी होगी

टमाटर के कचरे से तेल की जरूरतें पूरी होगी

संक्षेप:

यूरोप के वैज्ञानिकों ने टमाटर के कचरे से सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल बनाने की पहल की है। यह प्रोजेक्ट 2026 में शुरू होगा और 2030 तक यूरोप की जेट फ्यूल जरूरत का 3% पूरा कर सकता है। इसमें बायोमास को एडवांस तकनीक से तेल में बदला जाएगा। इससे ईंधन के साथ खाद और पशु आहार जैसे बाय-प्रोडक्ट्स भी बनेंगे।

Dec 21, 2025 02:14 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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यूरोप के वैज्ञानिकों ने शुरू की है नई पहल 3 फीसदी जरूरतें पूरी होने का अनुमान कचरे, जैसे पत्ते, तने, बीज, छिलके, कच्चे और सड़े हुए फल, को सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल में बदला जाएगा। ऑस्ट्रिया, एजेंसी। यूरोप में वैज्ञानिकों ने हवाई जहाजों के प्रदूषण को कम करने के लिए एक अनोखा तरीका खोजा है-टमाटर के कचरे से जेट फ्यूल बनाना। ऑस्ट्रिया की ग्राज यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के नेतृत्व में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट कचरे को कीमती ईंधन में बदलने की एक बड़ी पहल है। टमाटर के कचरे से तेल की जरूरतें पूरी होगी दुनिया में आलू के बाद टमाटर सबसे ज्यादा खाया जाता है।

यूरोप में हर साल 17 मेगाटन टमाटर पैदा होता है, जिससे बड़ी मात्रा में छिलके, बीज और तने कचरे के रूप में बचते हैं। वैज्ञानिक अब इसी कचरे को सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) में बदलेंगे। अनुमान है कि 2030 तक यूरोप की जेट फ्यूल की 3% जरूरत सिर्फ टमाटर के कचरे से पूरी हो सकती है। एडवांस तकनीक का इस्तेमाल वैज्ञानिक इसके लिए दो एडवांस तकनीक अपना रहे हैं। पहली तकनीक में बायोमास को गर्म और प्रेशराइज करके सूक्ष्मजीवों की मदद से तेल में बदला जाता है। दूसरी तकनीक (हाइड्रोथर्मल लिक्विफैक्शन) में गीले कचरे को उच्च तापमान पर सीधे बायो-ऑयल में बदला जाता है। अंत में, एचईएफए प्रोसेस के जरिए इस तेल को इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के जेट फ्यूल में रिफाइन किया जाता है। ईंधन के साथ अन्य फायदे भी यह प्रोजेक्ट सिर्फ फ्यूल ही नहीं बनाएगा, बल्कि टमाटर के कचरे से खाद, पशु आहार और पौष्टिक तेल जैसे बाय-प्रोडक्ट्स भी तैयार करेगा। इससे फूड कंपनियों को कचरा फेंकने के बजाय कमाई का नया जरिया मिलेगा और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा। नए साल पर शुरू होगा प्रोजेक्ट यह प्रोजेक्ट आधिकारिक तौर पर 1 जनवरी, 2026 से शुरू होगा। इसमें 7 यूरोपीय देशों के 11 पार्टनर शामिल हैं और इसका कुल बजट लगभग 4.1 मिलियन डॉलर रखा गया है। प्रोफेसर मार्लीन कीनबर्गर के अनुसार, उनका मुख्य लक्ष्य इस इको-फ्रेंडली फ्यूल को बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध कराना है।

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