
सर्दी का वायरस दे सकता है दिल का रोग
टैग - सेहत डेनमार्क के स्टेटेंस सीरम इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने किया अध्ययन
टैग - सेहत डेनमार्क के स्टेटेंस सीरम इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने किया अध्ययन - आरएसवी संक्रमण से दिल का दौरा, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर का खतरा अधिक - 45 साल से अधिक उम्र के 17,000 से ज्यादा मरीजों के डाटा का किया विश्लेषण कोपेनहेगन, एजेंसी। अगर आपको सामान्य सर्दी या खांसी होती है, तो उसे सिर्फ मौसम बदलने की मामूली परेशानी समझकर नजरअंदाज न करें। डेनमार्क में स्टेटेंस सीरम इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने इस संबंध में एक अध्ययन किया। उनके मुताबिक, रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (आरएसवी), जो आम तौर पर सर्दी-जुकाम का कारण बनता है, वह दिल के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है।

यह वायरस दिल का दौरा, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर जैसी जानलेवा दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। आरएसवी एक बहुत ही सामान्य और संक्रामक वायरस है। यह हर साल पतझड़ के मौसम में, ठीक फ्लू की तरह दुनिया भर में फैलता है। यह वायरस खांसी और छींक से निकलने वाली बूंदों से फैलता है और सतहों पर सात घंटे तक जीवित रह सकता है। ब्रिटेन में हर साल लगभग 30,000 बच्चों और 18,000 वयस्कों को इस वजह से अस्पताल जाना पड़ता है। अनुमान है कि 8,000 वयस्कों की मौत में भी यही कारण होता है। विशेषज्ञों ने इस वायरस के एक नए और गंभीर खतरे पर प्रकाश डाला है। उन्होंने 45 साल से अधिक उम्र के 17,000 से ज्यादा मरीजों पर नजर रखी और पाया कि जिन लोगों को आरएसवी संक्रमण हुआ था, उनमें संक्रमण के एक साल बाद दिल का दौरा, स्ट्रोक या हार्ट फेलियर होने का खतरा काफी ज्यादा था। इस संक्रमण के कारण एक साल के भीतर दिल की बीमारी होने का खतरा आम तौर पर 4.7 प्रतिशत अधिक था। जिन लोगों को पहले से ही दिल की बीमारी (जैसे हाई ब्लड प्रेशर या बंद धमनियां) थी, उनमें जोखिम 11.9 प्रतिशत तक बढ़ गया। अस्पताल में भर्ती होने वाले आरएसवी मरीजों में यह जोखिम 6.6 प्रतिशत था। 85 से 94 साल के बुजुर्गों में यह बढ़ोतरी 7.9 प्रतिशत तक देखी गई। बॉक्स - संक्रमण से खुद को कैसे बचाएं विशेषज्ञों ने कहा है कि यह अध्ययन बहुत महत्वपूर्ण है और बुजुर्गों में आरएसवी संक्रमण कितना खतरनाक हो सकता है, इसका सबूत देता है। उन्होंने योग्य लोगों से आरएसवी वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है। यह वैक्सीन 75 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए उपलब्ध है और बुजुर्गों को आरएसवी के कारण अस्पताल में भर्ती होने से 82 फीसदी तक बचा सकती है। गर्भवती महिलाओं को यह टीका लगाने से उनके शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी बच्चे तक पहुँच जाती है। इससे बच्चे को जन्म के बाद पहले छह महीनों तक सुरक्षा मिलती है और बच्चों में अस्पताल में भर्ती होने के लगभग 72 फीसदी मामलों को रोका जा सकता है। यह रिसर्च दिखाती है कि जो वायरस आम सर्दी जैसा लगता है, वह दिल के लिए भी खतरनाक हो सकता है। इसलिए बुजुर्गों और पहले से दिल की बीमारी वाले लोगों को इसके लक्षणों को हल्का नहीं समझना चाहिए और टीका लगवाना जरूरी है। हेडिंग, सब-हेडर और इंट्रो दें

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