विमान ईंधन की कीमतें स्थिर रखने के लिए 10 हजार करोड़ दिए
पश्चिम एशिया संकट के बीच हवाई किराए में बढ़ोतरी नहीं होगी। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में भारतीय अनु

पश्चिम एशिया संकट के बीच हवाई किराए में बढ़ोतरी नहीं होगी। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में भारतीय अनुसूचित एयरलाइंस को विमान ईंधन (एटीएफ) की बढ़ती कीमतों से राहत देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये तक विशेष मूल्य स्थिरीकरण कोष को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि तय शर्तों के हिसाब से कोष के जरिए तेल विपणन कंपनियों को वित्तीय सहायता ब्याज-मुक्त अग्रिम के रूप में दी जाएगी, जिसमें एयरलाइंस को ईंधन की कीमतों में अचानक होने वाली तेज बढ़ोतरी से बचाया जा सके। यह राशि तब उपयोग होगी जब अंतरराष्ट्रीय एटीएफ कीमतें तय मानक मूल्य से अधिक होंगी।
अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी आने पर कंपनियों से राशि वापस लेकर भारत की संचित निधि में जमा कराई जाएगी। इसका लाभ भारत की निर्धारित घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को मिलेगा। तेल कंपनियों द्वारा एयरलाइंस को एक निश्चित एटीएफ मूल्य पर ईंधन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे लागत का अनुमान लगाना आसान होगा। योजना में शामिल एयरलाइंस को अधिकतम तीन वर्ष तक केवल सरकारी तेल कंपनियों से ही एटीएफ खरीदना होगा। केंद्र सरकार ने तय किया है कि कोष के जरिए होने वाले खर्च एवं योजना की निगरानी नागरिक उड्डयन मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और व्यय विभाग की संयुक्त समिति करेगी। इसके साथ ही, सभी दावों और भुगतान का ऑडिट भी कराया जाएगा।ईंधन की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरीकेंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के चलते कच्चे तेल कीमतें बढ़ी है, जिसे एटीएफ की कीमतों में भी उछाल आया है। मार्च में एटीएफ की कीमत लगभग 60.50 रुपये प्रति लीटर थी, जो मई में बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। इसके प्रभाव घरेलू और मध्य वर्ग के यात्रियों पर न पड़े। इसलिए सरकार केंद्र सरकार ने एटीएफ मू्ल्य को घरेलू उड़ानों के परिचालन के लिए 75.6 प्रति लीटर पर कैप (अधिकतम सीमा तय) कर दिया था लेकिन जैसे ही, पश्चिम एशिया संकट लंबा चला तो तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ता गया। इसलिए सारे दिक्कतों को देखते हुए सरकार ने कोष की घोषणा की है।रोजगार को सुरक्षित रखने में मिलेगी मददकेंद्रीय मंत्री ने कहा कि एटीएफ की कीमतों में उछाल से करीब 77 लाख नौकरियों पर असर पड़ने की आशंका थी लेकिन अब उन पर कोई असर नहीं पडे़गा। इससे विमानन संचालन से एयरलाइंस, हवाई अड्डों, ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसियों, विमान मरम्मत , ट्रैवल एजेंसियों, होटल उद्योग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में रोजगार सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही, पर्यटन, व्यापार, निर्यात, निवेश और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। उड़ानों की बेहतर उपलब्धता से यात्रियों और उच्च मूल्य वाले कार्गो की आवाजाही आसान होगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।छोटे शहरों से बनी रहेगी हवाई कनेक्टिविटीसरकार का मानना है कि इस कदम से घरेलू विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर दबाव कम होगा और उन्हें अपने वित्तीय एवं व्यावसायिक निर्णय बेहतर तरीके से लेने में मदद मिलेगी। इससे उड़ानों की निरंतरता बनी रहेगी और किरायों में अचानक होने वाली भारी बढ़ोतरी पर भी कुछ हद तक नियंत्रण रहेगा। इसके साथ ही, दूरदराज, क्षेत्रीय, टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए हवाई सेवाओं को बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
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