
आईटीआर बनी आरोपी के खिलाफ सबूत, चेक बाउंस मामले में दोषी करार
रोहिणी जिला अदालत ने चेक बाउंस मामले में अजय गुप्ता को दोषी करार दिया है। शिकायतकर्ता अंशुल जैन ने अजय को 19.46 लाख रुपये एडवांस दिए थे, लेकिन सामान नहीं मिला और चेक बाउंस हो गया। अदालत ने अजय के आयकर रिटर्न को निर्णायक सबूत माना और कहा कि उसने अपनी कानूनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की।
नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। रोहिणी जिला अदालत ने चेक बाउंस के मामले में आरोपी को दोषी करार दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी संयम जैन ने कहा कि सबसे निर्णायक सबूत आरोपी अजय गुप्ता का अपना आयकर रिटर्न (आईटीआर) रहा। इसके आधार पर अजय को एनआई अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया गया। मामला कंप्यूटर पार्ट्स कारोबारी अंशुल जैन और अजय गुप्ता से जुड़ा है। शिकायतकर्ता अंशुल ने अदालत को बताया कि उसने अजय को लैपटॉप और कंप्यूटर पार्ट्स की आपूर्ति के लिए करीब 19.46 लाख रुपये एडवांस दिए, लेकिन न तो सामान मिला और न ही पूरी रकम लौटाई गई।

बाद में बकाया लगभग 15 लाख रुपये चुकाने के लिए अजय ने एक चेक दिया, जो जनवरी 2017 में बैंक में बाउंस हो गया। अजय ने अदालत में बचाव किया कि उसने केवल शिकायतकर्ता की मदद के लिए साइन की हुई चेकबुक दी थी ताकि सरकारी टेंडर के लिए टर्नओवर बढ़ा हुआ दिखाया जा सके। अदालत ने इसे अविश्वसनीय माना और नोट किया कि अजय के अपने आयकर रिटर्न में अंशुल की फर्म का नाम बकायेदार के रूप में दर्ज था। अदालत ने कहा कि आरोपी ने माना कि बैंक खाता पूरी तरह उसके नियंत्रण में था, और बिना उसकी जानकारी कोई लेनदेन नहीं हो सकता। आठ साल तक चले मुकदमे में अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अजय कानूनी देनदारी से बचने में असफल रहा और चेक वैध बकाया राशि के लिए ही था।

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