ईडी सरकार के इशारे पर काम करती है : वाड्रा
राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुग्राम में शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े धनशोधन मामले में कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा को जमानत मिल गई। वाड्रा ने ईडी पर आरोप लगाया कि वह सरकार के इशारे पर काम कर रही है। जमानत के बाद वाड्रा ने कहा कि वह सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करेंगे। अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुग्राम में शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े धनशोधन मामले में कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा को जमानत मिल गई। इसके बाद वाड्रा ने ईडी पर सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह निडर हैं, उन्हें कुछ भी छिपाना नहीं है। विशेष जज सुशांत चंगोत्रा की अदालत ने उन्हें इस मामले में 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के जमानती पर जमानत दे दी। मामले की अगली सुनवाई दस जुलाई को निर्धारित की गई है। कोर्ट से जमानत मिलने के बाद कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह हर सवाल का जवाब देने के लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगे। वह सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करेंगे और जांच में पूरा सहयोग देंगे। इस दौरान वाड्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत व अन्य अधिवक्ता पेश हुए। राउज एवेन्यू कोर्ट ने पिछले महीने इस मामले में ईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था, जिसके बाद वाड्रा समेत अन्य आरोपियों को समन जारी किया गया था। उसी के तहत वह शनिवार को अदालत में पेश हुए。
ईडी ने किया था याचिका का विरोध
बीते गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में वाड्रा की उस याचिका पर सुनवाई हुई थी, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के बाद समन जारी करने के आदेश को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान ईडी ने वाड्रा की याचिका का विरोध किया था। ईडी की ओर से अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि याचिका कानून की गलत व्याख्या पर आधारित है। वहीं, वाड्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि कथित मूल अपराध वर्ष 2008 से 2012 के बीच के हैं, जबकि कुछ धाराएं बाद में पीएमएलए के दायरे में लाई गईं। न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 18 मई को तय की है।
जमीन सौदे से जुड़ा है मामला
यह मामला फरवरी 2008 के उस जमीन सौदे से जुड़ा है, जिसकी जांच ईडी कर रही है। इसमें वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने शिकोहपुर में करीब 3.5 एकड़ जमीन 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। बाद में वर्ष 2012 में यह जमीन रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेची गई, जिससे इसकी कीमत में भारी बढ़ोतरी हुई। ईडी का आरोप है कि यह लेन-देन धनशोधन की एक बड़ी साजिश का हिस्सा था।
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