भारत पर व्यापक आर्थिक असर की आशंका

Mar 01, 2026 06:43 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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शोल्डर :: युद्ध के चलते शेयर बाजार और सोने-चांदी की कीमतों में सबसे अधिक उथल-पुथल

भारत पर व्यापक आर्थिक असर की आशंका

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता, एजेंसी। अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से पश्चिम एशिया में स्थिति लगातार बिगड़ रही है। इससे भारत की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। कच्चे तेल की कीमतों में तेल उछाल और प्रमुख व्यापारिक रास्ते बंद होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें और महंगाई बढ़ने का आशंका पैदा हो गई है। माना जा रहा है कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद किए जाने से स्थिति तेजी से बदलेगी। इस रास्‍ते भारत का माल खाड़ी देशों में पहुंचता है। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से दिसंबर के बीच भारत ने यहां करीब 50 अरब डॉलर का सामान (गैर तेल) भेजा, जो देश के कुल निर्यात का करीब 13% है।

इस मार्ग के आसपास भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से भारत के नॉन-ऑयल निर्यात का बड़ा हिस्सा खतरे में पड़ सकता है। मामले से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निर्यात पूरी तरह ठप तो नहीं होगा, लेकिन जोखिम बहुत बढ़ गया है। अगर तनाव लंबा खिंचा, तो माल भेजने की लागत बढ़ेगी और डिलीवरी में देरी होगी। सबसे अधिक असर इंजीनियरिंग सामान, जेम्स और ज्वेलरी, खाने के उत्पादों, केमिकल और निर्माण क्षेत्र के सामान के निर्यात पर देखने को मिल सकता है। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति का असर भारत की अर्थव्यवस्था, ईंधन की कीमतों, महंगाई और प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन पर पड़ेगा। वैकल्पिक रास्तों पर नजर मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार पल-पल की स्थिति पर नजर रख रही है कि युद्ध का दायरा कितना बढ़ता है। अधिकारी यह देख रहे हैं कि अगर पुराने व्यापारिक रास्तों में रुकावट आती है तो माल भेजने या मंगाने के लिए कौन से दूसरे रास्ते सुरक्षित हो सकते हैं। कोशिश यह है कि इस तनाव का असर भारत की जरूरी चीजों की सप्लाई और निर्यात पर कम से कम पड़े। विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रा दूरी बढ़ने से माल ढुलाई खर्च बढ़ना तय है और इससे आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव पड़ेगा। 100 डॉलर के पार जा सकते हैं कच्चे तेल के दाम माना जा रहा है कि अगर युद्ध जारी रहता है तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें 110 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। होर्मुज स्ट्रेट के जरिए वैश्विक तेल और एलएनजी की करीब 30 प्रतिशत आपूर्ति होती है। इस मार्ग में किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल-गैस की कीमतों पर बड़ा असर डाल सकता है। रविवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत लगभग 72.87 डॉलर प्रति बैरल और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चे तेल की कीमत 67.02 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी, लेकिन माना जा रहा है कि युद्ध लंबा चला और होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद रहा तो कीमतें 120 डॉलर तक पहुंच सकती हैं। स्ट्रेट दुनिया का सबसे जरूरी तेल निर्यात मार्ग है, जो सऊदी अरब, ईरान, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे सबसे बड़े गल्फ तेल उत्पादन को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। भारत के लिए ज्यादा चिंताजनक स्थिति मौजूदा समय में भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा करीब 50-60 प्रतिशत मध्य-पूर्व से आता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होगा तो भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें बढ़ेंगी। इसका परिणाम होगा कि परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिससे महंगाई भी बढ़ेगी। आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। वहीं, कच्चा तेल महंगा होने के बाद एक सीमा के बाद पेट्रोलियम कंपनियां भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने की दिशा में फैसला लेंगी। तेल आपूर्ति पर अभी खतरा नहीं अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग के कम अवधि के लिए बंद होने से भारत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि उसके पास ईंधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति है। कच्चे तेल का भंडार कम से कम 10 दिन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा, उनके ईंधन टैंक भरे हुए हैं, जो देश की 7-10 दिन की ईंधन जरूरत को आसानी से पूरा कर सकते हैं।'' यदि तनाव और बढ़ता है तो भारत के पास आकस्मिक योजनाएं तैयार हैं। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो देश रूसी तेल की खरीद बढ़ाकर अपने आयात स्रोतों में बदलाव कर सकता है। इसके अलावा भारत वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीका जैसे दूरदराज के देशों से भी तेल खरीद सकता है। कब-कब आई कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी - जुलाई 2008 में कच्चे तेल की कीमतें 147.50 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची। उस वक्त 42 से 43 रुपये प्रति डॉलर की कीमत थी। - वर्ष 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी कीमतें 120-130 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंची। उस वक्त 79 से 80 रुपये प्रति डॉलर की कीमत थी। - मौजूदा समय में 92 रुपये के मुकाबले एक डॉलर की कीमत है। ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल पर भारत के लिए खरीद महंगी होगी। सोने-चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल संभव जानकार मानते हैं कि युद्ध का सबसे बड़ा असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर भी देखने को मिलेगा। युद्ध के बीच कंपनियों के नतीजे प्रभावित होने की आशंका के बीच निवेशक सुरक्षित जगह अपना पैसा लगाने को प्राथमिकता देंगे। ऐसे में सोना-चांदी को सुरक्षित निवेश मानते हुए दुनिया भर में लोग मोटा पैसा लगा सकते हैं, जिसके चलते सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर जाने की संभावना है। रविवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,62,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गई। जबकि चांदी की कीमतों में 20 हजार रुपये की तेजी देखने को मिली, जो 2.85 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंची है। सोमवार को इसमें भारी तेजी की संभावना है। भारत के लिहाज से कई स्तर पर नुकसान डायमंड निर्यातक अजेश मेहता कहते हैं कि यह समय बहुत ही मुश्किल भरा है। एक तरफ सोने-चांदी में लोग बड़ा निवेश करेंगे, जिससे कीमतों में तेजी आएगी। इससे ज्वेलरी भी तेजी से महंगी होगी। आम आदमी के लिहाज से देखा जाए तो उसको ज्यादा नुकसान होगा। दूसरे युद्ध के चलते भारत का मध्य पूर्व में डायमंड व गोल्ड ज्वेलरी निर्यात भी बड़े पैमाने पर प्रभावित होगा। अभी यह नहीं बताया जा सकता है कि कितने प्रतिशत प्रभावित होगा लेकिन काफी नुकसान पूरी इंडस्ट्री को होने की आशंका है। इंफो होर्मुज रूट क्‍यों है अहम? - भारत होर्मुज स्ट्रेट से खाड़ी देशों को लगभग 47.6 अरब डॉलर (4.33 लाख करोड़ रुपये) का नॉन-ऑयल सामान निर्यात करता है। - यह भारत के कुल नॉन-ऑयल निर्यात का लगभग 13.2 फीसदी है। - भारत यहां से इंजीनियरिंग सामान, खाने-पीने की चीजें, कपड़े और दवाइयां बड़े पैमाने पर भेजता है। - भारत ने वहां से 116.45 अरब डॉलर का सामान (मुख्यतः तेल और गैस) मंगाया, जो हमारी कुल जरूरतों का पांचवां हिस्सा है। - 88 फीसदी कच्चे तेल की जरूरत आयात करता है। इसमें से लगभग आधा हिस्सा होर्मुज से होकर आता है।

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