तनाव के बीच आपूर्ति शृंखंला प्रभावित होने से बढ़ रही कीमतें

Newswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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पश्चिमी एशिया में तनाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है। निर्यात में गिरावट और आयात खर्च में वृद्धि हो रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण ऊर्जा खर्च बढ़ रहा है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है। कोल्ड ड्रिंक कैन की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है, जिससे कीमतों पर असर पड़ रहा है।

तनाव के बीच आपूर्ति शृंखंला प्रभावित होने से बढ़ रही कीमतें

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। पश्चिमी एशिया में जारी तनाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर दिख रहा है। खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात लगातार घट रहा है। वहीं, आयात से जुड़े खर्च बढ़ रहे हैं। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच मौजूदा वक्त में संघर्ष विराम है लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद होने भारत का ऊर्जा खर्च बढ़ रहा है। ऐसे में आशंका है कि आने वाले दिनों में भारत में महंगाई बढ़ सकती है क्योंकि कोल्ड ड्रिंक कैन समेत कई चीजों की सप्लाई में दिक्कत होने लगी है। तनाव के चलते भारत का खाड़ी देशों के साथ होने वाले कारोबार प्रभावित हुआ है।

यु्द्ध शुरू होने के बाद से भारत का कुल वस्तु निर्यात करीब साढ़े सात फीसदी गिरकर 38.92 अरब रह गया है, जो बीते वर्ष मार्च में 42.05 अरब डॉलर का रहा था। इसी तरह से आयात में 6.9 प्रतिशत की गिरावट आई है जो 63.74 अरब डॉलर से गिरकर 59.59 अरब डॉलर का रहा है। संघर्ष के चलते और होर्मुज के बंद होने के कारण मार्च तक पश्चिमी एशिया को होने वाला निर्यात 57.95 प्रतिशत गिरा जबकि आयात में 51.64 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। तनाव के चलते हर महीने करीब चार अरब तक का निर्यात जोखिम में फंसा है जबकि आयात आठ लाख करोड़ का खतरे में है। दरअसल आयात के लिहाज से देखा जाए तो तनाव के चलते आयात घटा है लेकिन उसकी लाग बढ़ गई है। खासकर पेट्रोलियम उत्पादों की आयात लागत काफी बढ़ गई है।----------------आईएमएफ ने भी जताई है चिंताहाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी तनाव को लेकर चिंता जाहिर की। आईएमएफ ने कहा कि तेल की कीमतें 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। इससे आयात बिल बढ़ेगा, जिसका असर महंगाई के तौर पर देखने को मिलेगा क्योंकि तनाव के चलते सप्लाई चेन बाधित होने और व्यापार प्रभावित होने से लागत बढ़ेगी। इससे व्यापार घाटा भी बढ़ेगा। क्योंकि आयात खर्च बढ़ेगा, जबकि निर्यात खर्च उतना नहीं बढ़ेगा। दरअसल, युद्ध के चलते शिपिंग लागत बढ़ी है। बीमा और अन्य जोखिम कवर भी बढ़ा दिया गया है, जिसका असर आयात-निर्यात पर पड़ रहा है।-----------आने वाले दिनों में बढ़ सकता है महंगाई- होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग लंबे समय तक बंद की स्थिति में पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई प्रभावित होगी, जिससे कीमतों पर असर पड़ेगा।- सप्लाई लंबे समय तक बाधित होने की वजह से आयात-निर्यात से जुड़ा खर्च बढ़ेगा, जिससे माल ढुलाई की लाग बढ़ने पर उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी।- युद्ध के बाद से अब तक औसतन महंगाई पांच फीसदी तक बढ़ी लेकिन आगे अधिक बढ़ सकती है।- कई उत्पादों की पैकेजिंग महंगाई होने से उत्पादों के दाम बढ़े, आग और अधिक बढ़ने की आंशका।-------------कोल्ड ड्रिंक कैन की कमीयुद्ध का बड़ा असर कोल्ड ड्रिंक से जुड़ी कैन की सप्लाई पर दिखाई दे रहा है। कैन बनाने वाली अधिकांश कंपनियों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है, जिसकी मुख्य वजह एलपीजी की कमी बताई जा रही है। पश्चिमी एशिया संकट के चलते युद्ध के दौरान करीब 30 लाख टन एल्युमिनियम प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों पर असर पड़ा है। भारत के लिहाज से देखा जाए तो भारत अपनी जरूरत के लिए करीब 30 फीसदी एल्युमिनियम कैन खाड़ी देशों से आयात करता था,जो अब काफी हद तक बंद है।

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