भीषण गर्मी ने कृषि मजदूरों के 216 अरब घंटे बर्बाद किए
बढ़ती गर्मी खेतों में काम के घंटे छीन रही है, जिससे खाद्य सुरक्षा को खतरा हो सकता है। 2024 में कृषि मजदूरों को 216 अरब घंटे गंवाने पड़े, जिससे प्रति श्रमिक 590 घंटे काम करने में कमी आई। अध्ययन में कई देशों का समावेश किया गया है जहां कृषि अत्यधिक गर्मी के कारण प्रभावित हो रही है।

बढ़ती गर्मी खेतों में काम के घंटे छीन रही है। इससे खाद्य सुरक्षा को लेकर एक नया खतरा पैदा हो सकता है। एनर्जी एंड क्लाईमेट इंटेलीजेंस की रिपोर्ट के अनुसार 2024 में भीषण गर्मी की वजह से कृषि मजदूरों को खेतों में कार्य करने के 216 अरब घंटे गंवाने पड़े। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि इन घंटों को प्रति कृषि श्रमिक के कामकाज में विभाजित कर दें तो प्रत्येक श्रमिक ने वर्ष के दौरान 590 घंटे यानी 49 कार्य दिवस हीट स्ट्रेस के चलते गंवा दिए। रत समेत ज्यादातर देशों में श्रमिकों के लिए करीब डेढ़ महीने के बराबर का कृषि कार्य गर्मी के चलते खत्म हो गया है। यह स्थिति साल-दर साल खराब होती जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रति श्रमिक हीट स्ट्रेस से होने वाला नुकसान हर साल लगभग चार से पांच घंटे बढ़ रहा है। यानी बढ़ती गर्मी खेतों में काम करने की क्षमता को धीरे-धीरे कम कर रही है。
भारत समेत कई देशों पर शोध
अध्ययन में भारत, ब्राजील, वियतनाम, केन्या, घाना, दक्षिण अफ्रीका और पेरू जैसे देशों का अध्ययन किया गया। ये वही देश हैं जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा चावल, कॉफी, चाय, कोको, फल और दूसरी कृषि उपज हासिल करती है। अब इन देशों की कृषि अत्यधिक गर्मी के कारण खतरे में है। दुनिया में हीट स्ट्रेस से होने वाले कुल घंटों में सर्वाधिक लगभग 63.5 प्रतिशत हिस्सा कृषि क्षेत्र से जुड़ा है।
तेज तापमान से बिगड़ रहे हालात
रिपोर्ट के अनुसार जिन देशों में तापमान 40 डिग्री से ऊपर जाता है, वहां ये समस्या सबसे ज्यादा गंभीर होते जा रही है और श्रमिकों का काम करना मुश्किल हो रहा। खुले में कार्य करने वाले सभी श्रमिकों के लिए मुश्किल बढ़ रही है लेकिन कृषि श्रमिकों की संख्या ज्यादा होने के कारण वहां प्रभाव सर्वाधिक है।
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