साइबर अपराध के चुनिंदा मामलों में ही दर्ज हो रहीं एफआईआर
भारत में साइबर अपराध बढ़ रहे हैं, लेकिन एफआईआर दर्ज करने की दर बेहद कम है। केवल 1-3% मामलों में ही एफआईआर दर्ज की जा रही है, जबकि हर साल लगभग 30 लाख शिकायतें की जा रही हैं। अधिकारियों ने राज्यों को गंभीर मामलों में त्वरित एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। देश में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। अधिकांश शिकायतों पर एफआईआर दर्ज नहीं हो रही। एक रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ एक से तीन फीसदी मामलों में ही एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। देश में साइबर अपराध के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी के बावजूद कानूनी कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। साइबर अपराध निगरानी से जुड़ी केंद्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पूरे देश में दर्ज शिकायतों में से केवल चुनिंदा मामलों में ही एफआईआर दर्ज की जा रही है।रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर हर साल शिकायतों की संख्या करीब 30 लाख तक पहुंच रही है।
वर्ष 2021 से 2025 के बीच साइबर अपराध शिकायतों में लगभग छह गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि में शिकायतों की औसत वार्षिक वृद्धि दर करीब 58 प्रतिशत रही, लेकिन इसके अनुपात में एफआईआर दर्ज करने की दर बेहद कम रही।आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक देश का औसत एफआईआर कन्वर्जन रेट केवल 2.22 प्रतिशत रहा। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम सत्यापन के बाद इसमें मामूली बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन इससे शिकायतों और एफआईआर के बीच मौजूद बड़े अंतर की समस्या दूर नहीं होगी।केंद्रीय स्तर पर इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए राज्यों और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि गंभीर मामलों में त्वरित एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसका उद्देश्य न केवल पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाना है, बल्कि साइबर अपराध से होने वाले आर्थिक और सामाजिक नुकसान को भी समय रहते रोका जा सके।
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