इंफो::कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर पार होने से महीने के बजट पर सीधा असर
या कच्चे तेल के अधिक दाम ने महीने का बजट बिगाड़ा नोट: कृप्या मिंट

या कच्चे तेल के अधिक दाम ने महीने का बजट बिगाड़ा
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गोपाल गिडवानी
नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अधिकांश समय कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर ही रही हैं।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से आपके महीने के बजट पर सीधा असर पड़ता है, जैसे रोजाना आने-जाने का खर्च बढ़ना, छुट्टियों में हवाई यात्रा के टिकट, किराने का सामान और बाहर खाना-पीना महंगा होना।
इसका अप्रत्यक्ष असर सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में भी दिखता है जो कच्चे तेल से बनी चीजों का इस्तेमाल करके बनाए जाते हैं।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ीं
अमेरिका-ईरान युद्ध के शुरुआती दौर में, भले ही कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई थीं, लेकिन भारतीय तेल कंपनियों ने ईंधन की घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की थी। ऐसा लग रहा था कि युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा और कच्चे तेल की कीमतें युद्ध से पहले के स्तर पर वापस आ जाएंगी। हालांकि, युद्ध 3 महीने से अधिक समय जारी और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।
नतीजतन, तेल कंपनियों ने पेट्रोल, डीजल,सीएनजी, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) और एलपीजी सिलेंडर जैसे ईंधन की कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं। मई में पेट्रोल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी की गई। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर डालने से यात्रा का खर्च बढ़ गया है।
अनाज, गैस और अन्य चीजों की कीमतें बढ़ीं
तेल की अधिक कीमतों से सामान (अनाज और अन्य चीजें) को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का खर्च बढ़ जाता है। इस बढ़ोतरी का बोझ आखिर में ग्राहकों पर डाला जाता है। नतीजतन, किराने का सामान और दूसरे उत्पाद महंगे हो जाते हैं।
मार्च से मई 2026 के बीच, कमर्शियल एलपीजी (19 किलो सिलेंडर) की कीमतों में हर महीने बढ़ोतरी हुई। सबसे अधिक बढ़ोतरी मई में हुई। रेस्टोरेंट ने अपने मेन्यू की कीमतें बढ़ाकर इस बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर डाल दिया है।
बाहर भोजन के लिए देने पड़ रहे ज्यादा पैसे
अगर आप खाने-पीने के शौकीन हैं तो बाहर भोजन महंगा पड़नेवाला है। आपको या तो बाहर खाने के लिए अपने महीने के बजट में ज्यादा पैसे रखने होंगे या फिर बाहर खाने की आदत कम करनी होगी। घरेलू एलपीजी ग्राहकों को राहत मिली है, क्योंकि उनके लिए सिलेंडर की कीमत में सिर्फ 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
बढ़ी हवाई टिकटों का बोझ भी ग्राहकों पर
कंपनियों ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतें बढ़ाकर ईंधन की अधिक कीमतों का बोझ एयरलाइंस पर डाल दिया है। इसके बाद एयरलाइंस ने एटीएफ की कीमतों और दूसरे खर्चों के कारण बढ़ी हुई लागत का बोझ टिकट की कीमतें बढ़ाकर ग्राहकों पर डाल दिया है। अप्रैल और मई आमतौर पर यात्रा के लिए व्यस्त महीने होते हैं क्योंकि कई परिवार अपनी सालाना छुट्टियों की योजना इसी दौरान बनाते हैं।
टिकट की ऊंची कीमतों ने कई परिवारों के छुट्टियों के बजट को बिगाड़ दिया। नतीजतन, कुछ परिवारों ने या तो कम छुट्टियां मनाईं या फिर अपनी यात्रा को टाल दिया या रद्द कर दिया।
सामान की ऊंची कीमतें
पेट्रोकेमिकल्स का इस्तेमाल कपड़े, कालीन, बैग इत्यादि बनाने में पॉलिएस्टर, नायलॉन और स्पैन्डेक्स बनाने के लिए होता है। पानी की बोतलें और भोजन के डिब्बे जैसे प्लास्टिक के उत्पादों को बनाने में भी पेट्रोकेमिकल्स की जरूरत होती है। कीमतें बढ़ने से सभी तैयार उत्पादों की लागत बढ़ गई है। मैन्युफैक्चरर्स ने बढ़ी हुई लागत का बोझ उत्पादों की कीमतें बढ़ाकर ग्राहकों पर डाल दिया है।
गैजेट्स के लिए ज्यादा पैसे देने होंगे
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, एफपीआई की बिकवाली और अन्य कारणों से भारतीय रुपया लगातार गिर रहा है और नए निचले स्तर पर पहुंच रहा है। रुपये की गिरती कीमत से सभी सामानों का आयात महंगा हो जाता है। इस बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर ऊंची कीमतों के रूप में डाला जाता है। आयात किए मोबाइल, लैपटॉप या कोई अन्य गैजेट के लिए अधिक पैसे खर्च करने होंगे।
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