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दुनियाभर में फसलों की पैदावार बढ़ रही, पर पोषक तत्व कम हो रहे

दुनियाभर में फसलों की पैदावार बढ़ रही, पर पोषक तत्व कम हो रहे

संक्षेप:

या कार्बन डाईऑक्साइड के बढ़ते स्तर से फसलों के पोषक तत्व कम हो रहे या

Dec 20, 2025 03:33 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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या कार्बन डाईऑक्साइड के बढ़ते स्तर से फसलों के पोषक तत्व कम हो रहे या अधिक कार्बन डाईऑक्साइड फसलों से प्रोटीन, जिंक, आयरन जैसे पोषक तत्व घटा रहा बढ़ते कार्बन डाइऑक्साइड के कारण भोजन अधिक कैलोरी वाला पर कम पौष्टिक हो रहा अध्ययन लीडेन यूनिवर्सिटी नीदरलैंड्स के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया चावल, आलू, टमाटर और गेहूं सहित 43 फसलों पर अध्ययन नीदरलैंड दुनिया के सबसे बड़े कृषि निर्यातकों में से एक है, जिसका तीन-चौथाई उत्पादन निर्यात के लिए होता है नीदरलैंड, एजेंसी। पर्यावरण में मौजूद अत्यधिक कार्बन डाइऑक्साइड फसलों के पोषक तत्वों को खत्म कर रहे हैं। इससे भोजन अत्यधिक कैलोरी वाला लेकिन कम पौष्टिक हो रहा है।

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नीदरलैंड की लीडेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह दावा किया है। वैज्ञानिकों ने कहा कि कार्बन डाइऑक्साइ़ड के बढ़ते स्तर से फसलों की पैदावार बढ़ती है लेकिन पोषक तत्व कम हो जाते हैं। आनेवाले समय में यह समस्या और गंभीर होगी। भारत सहित दुनियाभर में हुए अध्ययन का विश्लेषण वैज्ञानिकों ने कार्बन डाईऑक्साइड के बढ़े हुए स्तरों पर पौधों की प्रतिक्रियाओं पर भारत सहित 15 देशों में हुए अध्ययनों की तुलना की। उनके अनुसार नतीजे चौंकानेवाले थे। फसलों में पोषक तत्वों खासकर जिंक का स्तर कम पाया गया, जबकि लेड का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया। वैज्ञानिकों का दावा है कि भोजन की पूरी बनावट में बदलाव नजर आ रहा है। शोधकर्ताओं ने कहा कि वातावरण में बढ़ती कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा न केवल धरती को गर्म कर रही है, बल्कि हमारे भोजन को भी अंदर से खोखला बना रही है। यह अध्ययन ग्लोबल चेंज बायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुई है। पोषक तत्वों की भारी किल्लत अध्ययन में पाया गया कि चावल और गेहूं में भी आयरन, जिंक और प्रोटीन की भारी कमी देखी गई है, यह और बढ़ेगी। साल 2065 तक जब सीओटू का स्तर और बढ़ेगा, तब हमारी फसलों में पोषण औसतन 3.2% कम हो जाएगा। सबसे बुरा असर चने पर पड़ेगा, जिसमें जिंक की मात्रा 37.5% तक गिर सकती है। यह रिसर्च एक और खुलासा करती है। जहां एक तरफ जरूरी पोषक तत्व कम हो रहे हैं, वहीं फसलों में लेड (सीसा) जैसे भारी और जहरीले धातुओं की मात्रा बढ़ती देखी गई है। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। अध्ययन के अनुसार सीओटू का स्तर अब 425.2 पार्ट्स प्रति मिलियन है, पहले ही यह बढ़ने के कारण पौधों के पोषण का स्तर कम हो गया है। कैसे किया गया अध्ययन? शोधकर्ता स्टेरे टेर हार और उनकी टीम ने चावल, आलू, टमाटर और गेहूं जैसी 43 फसलों पर दुनियाभर में हुए अध्ययन और करीब 60,000 अलग-अलग मापों का बारीकी से अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि कार्बनडाईऑक्साइड बढ़ने का बुरा असर लगभग हर फसल पर पड़ रहा है। मुख्य शोधकर्ता टेर हार ने कहा कि हमें जल्द ही अपने खेती करने के तरीकों और खान-पान की आदतों को बदलना होगा। अध्ययन जलवायु परिवर्तन के फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव पर बढ़ते शोध का हिस्सा है। नीदरलैंड दुनिया के सबसे बड़े कृषि निर्यातकों में से एक है, जिसका तीन-चौथाई उत्पादन निर्यात के लिए होता है। भारत पर भी बुरा प्रभाव हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित पूर्व के अध्ययनों में बताया गया है कि फसलों में पोषण की कमी का बुरा असर भारत पर पड़ेगा। अनुमान है कि 2050 तक सीओटू के बढ़ते स्तर के कारण अकेले भारत में लगभग 5 करोड़ लोग जिंक की कमी और 3.8 करोड़ लोग प्रोटीन की कमी का शिकार हो सकते हैं। देश में बड़ी आबादी पहले से ही आयरन की कमी के कारण एनीमिया से जूझ रही है, यह और गंभीर हो सकती है। भारत की अधिकांश आबादी चावल और गेहूं पर निर्भर है। इन फसलों पर बढ़ते कार्बन डाइऑक्साइड का नकारात्मक प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ता है। शोध की प्रमुख बातें -फसलों के सभी पोषक तत्वों(जिंक, आयरन इत्यादि) में कमी आई -चने में जिंक 37.5% तक कम हो गया है, जबकि सोयाबीन में रुबिडियम 31.7% तक बढ़ गया है। -चावल और गेहूं दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी का मुख्य भोजन हैं। इन दोनों में प्रोटीन, जिंक और आयरन जैसे जरूरी तत्वों में भारी गिरावट देखी गई -इसका परिणाम यह होगा कि लोगों का पेट तो भरा रहेगा (कैलोरी मिलेगी), लेकिन शरीर कुपोषित रह जाएगा। -गेहूं में लेड की मात्रा 170% तक बढ़ सकती है। इसके अलावा क्रोमियम और निकल जैसे तत्व भी बढ़ेंगे