
खुदरा महंगाई की दर में मामूली वृद्धि
भारत में खुदरा महंगाई दर नवंबर में 0.71 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि अक्टूबर में यह 0.25 प्रतिशत थी। पिछले साल नवंबर में यह दर 9.04 प्रतिशत थी। खाद्य महंगाई -3.91 प्रतिशत पर रही। सब्जियों और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण यह स्थिति बनी है।
शोल्डर::खुदरा महंगाई लगातार 10वें महीने भी आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे बनी रही नंबर गेम खुदरा महंगाई 0.71 प्रतिशत पर पहुंची खुदरा महंगाई दर नवंबर में 0.25 प्रतिशत पर थी अक्तूबर में खुदरा महंगाई दर 9.04 प्रतिशत पर थी पिछले साल नवंबर में यह दर खाद्य महंगाई -3.91 प्रतिशत पर रही खाद्य मुद्रस्फीति दर नवंबर में -5.02 प्रतिशत पर थी अक्तूबर में खाद्य महंगाई दर 5.48 प्रतिशत पर थी पिछले साल नवंबर में यह दर नई दिल्ली, एजेंसी। सब्जियों और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण उपभोक्ता मूल्य आधारित मुद्रास्फीति यानी खुदरा महंगाई की दर नवंबर में 0.71 प्रतिशत दर्ज की गई।

शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में खुदरा महंगाई की दर में मामूली वृद्धि दर्ज की गई और यह अक्तूबर 2025 में 0.25 प्रतिशत थी। पिछले साल नवंबर में खुदरा महंगाई 9.04 प्रतिशत पर रही थी। खाद्य मुद्रास्फीति की दर शून्य से 3.91 प्रतिशत नीचे रही। यह लगातार छठा महीना है जब खाद्य मुद्रास्फीति दर शून्य से कम रही है। यह अक्टूबर में 5.02 प्रतिशत और पिछले साल नवंबर में 5.48 प्रतिशत दर्ज की गई थी। सब्जियां, अंडे, मांस, मछली, मसाले और ईंधन-प्रकाश श्रेणी में कीमतें बढ़ने से नवंबर की महंगाई दर पर प्रभाव पड़ा। आंकड़ों में बताया गया है कि सब्जियों की कीमतों में एक साल पहले के मुकाबले 22.20 प्रतिशत और दालों तथा उनके उत्पादों की कीमतों में 15.86 प्रतिशत की गिरावट आयी है। वहीं, तेल एवं अन्य वसा युक्त उत्पादों के दाम 7.87 प्रतिशत, फलों के दाम 6.87 प्रतिशत, चीनी तथा कंफेक्शनरी उत्पादों के 4.02 प्रतिशत और अंडों के 3.77 प्रतिशत बढ़े। दूध तथा उनसे बने उत्पाद भी 2.45 प्रतिशत महंगे हुए हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के अनुसार, खुदरा महंगाई लगातार 10वें महीने भी आरबीआई के चार प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे बनी रही। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की वर्तमान सीरीज, जिसकी शुरुआत 2014 से मानी जाती है, में यह दूसरा महीना है जब महंगाई एक प्रतिशत के नीचे दर्ज की गई है। आरबीआई को मिली दरें घटाने की गुंजाइश वर्तमान वित्त वर्ष में कम महंगाई ने आरबीआई को कुल मिलाकर 1.25 प्रतिशत अंक तक ब्याज दरें घटाने का अवसर दिया है। केंद्रीय बैंक ने हाल ही में इस वर्ष की महंगाई अनुमान को घटाकर दो प्रतिशत कर दिया है, जो इससे पहले 2.6 प्रतिशत था। आरबीआई ने इसे देश में तेजी से गिरती महंगाई की प्रक्रिया का नतीजा बताया। इससे पहले, भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने कहा था कि सेंट्रल बैंक को अब उम्मीद है कि मौजूदा वित्त वर्ष में महंगाई औसतन 2.0 फीसदी रहेगी, जो उसके पहले के 2.6 फीसदी के अनुमान से बहुत कम है और एक महीने पहले किए गए रॉयटर्स के सर्वेक्षण के 2.2 फीसदी के अनुमान से भी कम है। ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि बेस इफेक्ट के सामान्य होने और कुछ सब्जियों के दाम बढ़ने से अगली महंगाई रिपोर्ट में 1.5 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है। यह रिपोर्ट फरवरी 2026 की एमपीसी की बैठक से पहले जारी होगी और इसी के आधार पर आगे की मौद्रिक नीति पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर मौजूदा हालात संकेत देते हैं कि फरवरी की आरबीआई की बैठक में ब्याज दरों में किसी बदलाव की संभावना कम है। महंगाई नियंत्रण में रहेगी पीएचडीसीसीआई के सीईओ एवं सचिव-जनरल रंजीत मेहता ने कहा कि अगले दो तिमाहियों में भारत की महंगाई नियंत्रण में रहने की उम्मीद है। उन्होंने इसके पीछे कई कारण बताए -खाद्य कीमतों में नरमी, जीएसटी दरों का संतुलन, ऊर्जा कीमतों की स्थिरता और आरबीआई की रणनीतिक मौद्रिक नीतियां। कोटक महिंद्रा बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज ने कहा कि आने वाले महीनों में महंगाई धीरे-धीरे ऊपर जा सकती है, लेकिन यह रुझान वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही तक काफी नरम रहेगा। उन्होंने बताया कि 25 आधार अंक की रेपो रेट कटौती की थोड़ी गुंजाइश है, हालांकि दरों में कटौती का सिलसिला अब लगभग समाप्ति के करीब है और आगे लंबे समय तक स्थिरता रहेगी।

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