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18 जनवरी, 2021|12:30|IST

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पहली बार ई-कोर्ट का नियमित संचालन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई

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अलविदा 2020

- 90 फीसदी से ज्यादा वकीलों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई को तरजीह दी

- 16 मार्च को निर्भया के गुनहगारों की याचिकाएं खारिज, 20 मार्च को फांसी दी गई

नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता

कोरोना महामारी के चलते वर्ष 2020 काफी चुनौतीपूर्ण समय होने के बावजूद कई उपलब्धियों के लिए भी जाना जाएगा। खासकर, जब महामारी की वजह से जब देश में गतिविधियां थम सी गईं तब भी दिल्ली उच्च न्यायालय और जिला अदालतों में कामकाज जारी रहा। इस दौरान ई-कोर्ट नियमित कामकाज में शामिल हुआ और अधिकतर सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की गईं। अदालत से कई बड़े फैसले भी दिए गए, जिनके लिए यह साल जाना जाएगा।

मध्य रात्रि में सुनवाई

इस साल उच्च न्यायालय ने दो मामलों में मध्यरात्रि में विशेष सुनवाई की। इनमें एक मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे से जुड़ा हुआ था तो दूसरा निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामला का था।

लॉकडाउन के दौरान भी सुनवाई

इस साल लॉकडाउन के दौरान जब प्राय: सभी तरह की गतिविधियां ठप पड़ी थीं, तब भी न्याय तक सबकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अदालतों में सुनवाई चलती रहीं। उच्च न्यायालय ने केंद्र और दिल्ली सरकार को लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा रोकने और पीड़िताओं की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए। इस दौरान बेघर श्रमिकों को खाना, पानी, बिजली आदि सुनिश्चित करने संबंधी निर्देश भी दिए गए।

सितंबर से प्रत्यक्ष सुनवाई

देश में 25 मार्च को लॉकडाउन लगाए जाने के एक दिन बाद ही बिना समय गंवाए उच्च न्यायालय के साथ ही जिला अदालतों में भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जरूरी मामलों की सुनवाई शुरू हो गई। इस दौरान केवल दोनों पक्षों के वकीलों को ही सुनवाई में शामिल होने की इजाजत दी गई थी। उच्च न्यायालय के आंकड़ों के मुताबिक, 90 प्रतिशत से ज्यादा वकीलों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई को तरजीह दी। हालांकि, सितंबर में उच्च न्यायालय ने कुछ वकीलों के आग्रह के कारण सीमित स्तर पर प्रत्यक्ष तरीके से सुनवाई शुरू की।

2015 का तोमर का चुनाव रद्द

उच्च न्यायालय ने फर्जी घोषणापत्र देने के कारण दिल्ली के पूर्व विधि मंत्री जितेंद्र तोमर के 2015 के चुनाव को रद्द कर दिया।

स्वास्थ्य संबंधी कई निर्देश

मार्च के बाद अदालत ने स्वास्थ्यकर्मियों, सफाई कर्मचारियों को पीपीई किट प्रदान करने, महामारी के समय रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को मेडिकल कवर, नगर निगमों के शिक्षकों, डॉक्टरों, नर्सों के बकाया वेतन देने समेत कई मुद्दों पर लगातार सुनवाई की और निर्देश जारी किए।

न्यायमूर्ति एस मुरलीधर का स्थानांतरण

न्यायमूर्ति एस मुरलीधर ने भाजपा के तीन नेताओं के नफरत वाले कथित भाषणों के लिए उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस द्वारा मामला दर्ज नहीं करने पर रोष प्रकट किया। इसके कुछ घंटे बाद ही केंद्र सरकार ने एस मुरलीधर का स्थानांतरण पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में करने की अधिसूचना जारी कर दी थी। कई लोगों ने इसे इस बयान से जोड़कर केंद्र सरकार पर आरोप लगाए लेकिन न्यायमूर्ति मुरलीधरन ने विदाई समारोह में स्पष्ट किया कि दंगा मामले की सुनवाई के बहुत पहले ही उन्हें स्थानांतरण के बारे में बता दिया गया था।

ये फैसले यादगार रहे

- निर्भया के तीन गुनहगारों ने फांसी रोकने के लिए 16 मार्च की देर शाम अदालत का रुख किया। हालांकि, उच्च न्यायालय के साथ उच्चतम न्यायालय ने भी उनकी याचिकाएं खारिज कर दी और 20 मार्च की सुबह उन्हें फांसी दे दी गई।

- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के आरंभिक दिनों में अदालत ने कोरोना वायरस संबंधी बंदिशों के कारण विदेशों में फंसे छात्रों और दूसरे नागरिकों की याचिकाओं पर सुनवाई की और प्राधिकारों को उनके लिए कदम उठाने के निर्देश दिए।

- जेल में भीड़-भाड़ काम करने के लिए पैरोल और अंतरिम जमानत पर कैदियों को छोड़ने के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय के एक वरिष्ठ न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया।

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  • Web Title:Regular operation of e-court for the first time hearing through video conferencing