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बाजार ही रुपये का स्तर तय करेगा : आरबीआई गवर्नर

बाजार ही रुपये का स्तर तय करेगा : आरबीआई गवर्नर

संक्षेप:

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि रुपये के लिए कोई मूल्य स्तर नहीं है और बाजार कीमतें तय करता है। उन्होंने कहा कि आरबीआई का प्रयास असामान्य उतार-चढ़ाव को कम करना है। भारतीय अर्थव्यवस्था ने अच्छा प्रदर्शन किया है और जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाया गया है।

Dec 05, 2025 07:44 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, एजेंसी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि हम रुपये के लिए मूल्य का कोई स्तर या दायरा नहीं रखते हैं। हम बाजारों को ही कीमतें तय करने देते हैं। लंबी अवधि में बाजार काफी प्रभावी होते हैं। केंद्रीय बैंक घरेलू मुद्रा को खुद ही अपना ‘सही स्तर’ खोजने की अनुमति देता है। मल्होत्रा का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब रुपया इसी हफ्ते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90 के स्तर को पार कर अपने सबसे निचले भाव पर पहुंच गया। उन्होंने कहा कि बाजार में उतार-चढ़ाव होते रहते हैं और आरबीआई का प्रयास हमेशा असामान्य या अत्यधिक उतार-चढ़ाव को कम करना होता है।

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इसके साथ ही आरबीआई ने बैंकों में एक लाख करोड़ रुपये की नकदी डालने की भी घोषणा की। इससे अर्थव्यवस्था को अमेरिकी शुल्क के प्रभाव से सुरक्षित रखने और रुपये की कीमत में आई गिरावट से निपटने में मदद मिलेगी। इस कदम पर मल्होत्रा ने साफ किया कि यह रुपये की गिरावट को रोकने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह एक नकदी उपाय है। मजबूत संकेत इस साल अब तक रेपो रेट में कुल 125 आधार की कटौती हो चुकी है, जिससे साफ है कि आरबीआई अर्थव्यवस्था की रफ्तार और मजबूती करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। सस्ते ऋणों के जरिए बाजार में मांग को बढ़ाने में मदद की जा रही है। शहरी मांग, निवेश और कृषि क्षेत्र के मोर्चे पर मजबूत संकेत है। गवर्नर ने कहा कि बाहरी मुश्किलों और चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अच्छा प्रदर्शन कर रही है। देश की आर्थिक विकास दर आगे भी मजबूत रहने की पूरी संभावना है। भारतीय अर्थव्यवस्था का खुशनुमा दौर आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वित्त वर्ष की पहली छमाही में आठ की जीडीपी वृद्धि और कम होती महंगाई दर एक आदर्श स्थिति है। इन दोनों स्थितियों के मिलने से अर्थव्यवस्था के लिए एक दुर्लभ 'खुशनुमा दौर' बनता है।इसका मतलब है कि भारत तेज विकास की पटरी पर है और महंगाई भी काबू में है, जो भविष्य के लिए बहुत अच्छा संकेत है। बैठक के प्रमुख फैसले - वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत किया गया। - चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान 2.6 प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत किया गया। - आरबीआई बाजार में नकदी बढ़ाने के लिए एक लाख करोड़ रुपये की सरकारी बांड खरीदेगा। - रिजर्व बैंक तीन साल की अवधि वाला पांच अरब डॉलर का 'खरीब-बिक्री' डॉलर-रुपया अदलाबदली करेगा। - एमपीसी ने मौद्रिक नीति के रुख को 'तटस्थ' बनाए रखने का भी फैसला किया।