एफडी की ब्याज दरों में आ सकती है गिरावट
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि नीतिगत ब्याज दरें लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहेंगी और इनमें आगे कमी संभव है। आरबीआई ने अभी कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन सावधि जमा (एफडी) पर ब्याज दरों में गिरावट की संभावना है। किसान क्रेडिट कार्ड और एमएसएमई को ज्यादा ऋण की संभावना पर भी चर्चा हुई।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि प्रमुख नीतिगत ब्याज दरें लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहेंगी तथा आगे इनमें और कमी भी हो सकती है। आरबीआई ने अभी नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है जो 5.25 प्रतिशत पर बनी रहेगी। हालांकि आरबीआई गवर्नर ने कहा कि लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहती है तो इनमें आगे चलकर गिरावट भी आ सकती है। ऐसे में सावधि जमा (एफडी) पर ब्याज दरों में आगे कमी आएगी। ध्यान रहे कि बीते वर्ष से फरवरी अब तक आरबीआई रेपो दर में 1.25 प्रतिशत की कटौती कर चुका है, जिसके बाद ग्राहकों द्वारा बैंकों से लिए जाने लोन में गिरावट आई है लेकिन साथ में एफडी जैसी जमा योजनाओं पर ब्याज दर भी कम हुई है।
---------- केसीसी की बढ़ाई जा सकती है ऋण सीमा आरबीआई ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना और बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट मॉडल की व्यापक समीक्षा की है। इससे संबंध में संशोधित दिशा-निर्देशों का मसौदा जारी किया जाएगा। लीड बैंक डेटा के बेहतर प्रबंधन के लिए एक एकीकृत रिपोर्टिंग पोर्टल भी शुरू करेंगे। इसी बीच अब संभावना है कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत तीन लाख की उच्चतम ऋण सीमा को बढ़ाकर जल्द ही पांच लाख किया जा सकता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आम बजट में भी केंद्र सरकार ऋण सीमा को बढ़ाने का ऐलान कर चुकी है। -------------- एमएसएमई को मिलेगा ज्यादा गारंटी मुक्त ऋण एमपीसी की बैठक में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बिना गारंटी के दिए जाने वाले ऋणों की 10 लाख रुपये की सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। इससे एमएसएमई को अपना विस्तार करने और नई इकाई खोलने में मदद मिलेगी। इसी तरह से रियल एस्टेट क्षेत्र को वित्तपोषण को और बढ़ावा देने के लिए बैंकों को कुछ विवेकपूर्ण सुरक्षा उपायों के साथ आरईआईटी को ऋण देने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। कीमती धातुओं के कारण मुद्रास्फीति अनुमान बढ़ाया आरबीआई ने कीमती धातुओं के मूल्य में बढ़ोतरी के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति अनुमान को मामूली रूप से बढ़ाकर शुक्रवार को 2.1 प्रतिशत कर दिया है। वहीं अगले वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के लिए भी अनुमान ऊपर की ओर संशोधित किए गए हैं। कीमती धातुओं के मूल्यों में तेजी के बावजूद मुख्य मुद्रास्फीति (खाद्य एवं ईंधन को छोड़कर सीपीआई) भी नियंत्रण में रही। सोने के अलावा दिसंबर में मुख्य मुद्रास्फीति 2.6 प्रतिशत पर स्थिर रही। केंद्रीय बैंक ने 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति क्रमशः चार प्रतिशत और 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। आरबीआई ने दिसंबर में 2025-26 के लिए इसके दो प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। वहीं 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए महंगाई दर क्रमशः 3.9 प्रतिशत और चार प्रतिशत आंकी गई थी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित कुल मुद्रास्फीति नवंबर में 0.7 प्रतिशत और दिसंबर, 2025 में 1.3 प्रतिशत रही। बैंकों को रीट को ऋण देने की अनुमति पर विचार कर रहा है रिजर्व बैंक भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए वित्तपोषण के स्रोत को व्यापक बनाने के उद्देश्य से बैंकों को कुछ विवेकपूर्ण रक्षोपायों के साथ 'रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट' (रीट) को कर्ज देने की अनुमति देने का प्रस्ताव किया। रीट ऐसे निवेश माध्यम हैं जो आय उत्पन्न करने वाली रियल एस्टेट संपत्तियों के मालिक होते हैं या उनका संचालन करते हैं, जिससे निवेशक सीधे संपत्ति खरीदे बिना उससे होने वाली आय में हिस्सा पाने में सक्षम होते हैं। भारत में रीट और इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट्स) की अवधारणा संस्थानों और खुदरा निवेशकों के एकत्रित कोष के माध्यम से निवेश को पुनर्वित्त कर, पूर्ण और परिचालन वाली रियल एस्टेट व बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में फंसे बैंकों के कोष को मुक्त करने के लिए की गई थी। एमपीसी की अन्य अहम बातें - हाल के महीनों में वैश्विक चुनौतियां बढ़ी हैं, लेकिन व्यापार समझौतों से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। - नवंबर-दिसंबर में महंगाई नियंत्रण में रही। 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही में महंगाई क्रमशः 4.0 और 4.2 फीसदी रहने का अनुमान है। - सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि से महंगाई थोड़ी बढ़ी है लेकिन अर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। - भारतीय अर्थव्यवस्था वर्ष 2025-26 में 7.4 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना है। - सेवाएं और विनिर्माण क्षेत्र मुख्य योगदानकर्ता हैं। कृषि, निर्माण और सेवा क्षेत्र मजबूत बने रहेंगे। - ग्रामीण और शहरी मांग में सुधार होगा। बैंक ऋण और निवेश बढ़ने की संभावना है। - 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही में विकास दर क्रमशः 6.9 और 7.0 फीसदी रहने का अनुमान है। - 30 जनवरी तक विदेशी मुद्रा भंडार 723.8 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
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