
विदर्भ से 450 किलोमीटर की यात्रा कर बाघ येदशी अभयारण्य पहुंचा
विदर्भ से 450 किलोमीटर की यात्रा कर एक नर बाघ येदशी रामलिंग घाट वन्यजीव अभयारण्य पहुंचा। यह बाघ लगभग तीन साल का है और इसे स्थानीय शिव मंदिर के नाम पर 'रामलिंग' नाम दिया गया है। अभयारण्य में बाघ के...
छत्रपति संभाजीनगर, एजेंसी। विदर्भ से 450 किलोमीटर की लंबी यात्रा कर एक नर बाघ येदशी रामलिंग घाट वन्यजीव अभयारण्य में पहुंचा और अपनी नई रिहाइश बनाई। यह अभयारण्य महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में स्थित है और पिछले कई दशकों में यहां किसी बड़े बाघ को नहीं देखा गया था। रेंज वन अधिकारी अमोल मुंडे ने बताया कि लगभग तीन साल का यह बाघ विदर्भ के टिपेश्वर से यहां आया है। वन कर्मचारियों ने इसे स्थानीय प्रसिद्ध शिव मंदिर के नाम पर ‘रामलिंग नाम दिया है। मुंडे ने बताया कि 22.5 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अभयारण्य में तेंदुए, भालू, सियार, भेड़िये, हिरण, खरगोश सहित लगभग 100 प्रजातियों के पशु-पक्षी पाए जाते हैं।

बाघ को कैमरा ट्रैप की मदद से टिपेश्वर के बाघ से मिलान कर उसकी पहचान और मूल स्थान की पुष्टि की गई। वन अधिकारी ने कहा कि येदशी रामलिंग घाट अभयारण्य छोटा है, लेकिन बाघ बार्शी, भूम, तुलजापुर और धाराशिव तालुकाओं में विचरण करता है। अब तक उसने किसी इंसान पर हमला नहीं किया है। यह बाघ 1971 के बाद मराठवाड़ा में देखा गया चौथा बाघ है।

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