राज्यसभा: तीन-छह वर्ष के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा के प्रस्ताव का सबने किया समर्थन
राज्यसभा में सदस्यों ने सुधा मूर्ति के निजी संकल्प की सराहना की, जिसमें तीन से छह साल के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा और पोषण गारंटी का प्रस्ताव दिया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षित माताएं अर्थव्यवस्था में योगदान देती हैं और बच्चों के समुचित विकास के लिए सही पोषण की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। राज्यसभा में शुक्रवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति के एक निजी संकल्प को सराहा, जिसमें उन्होंने तीन से छह साल के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा और पोषण गारंटी का प्रस्ताव दिया था। सुधा मूर्ति ने अपना एक निजी संकल्प पेश करते हुए कहा कि एक शिक्षित माता अर्थव्यवस्था में अपना विशेष योगदान देती है। उन्होंने कहा कि गर्भवर्ती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को सही पोषण देने से बच्चों का समुचित शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है। संकल्प में छोटे बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और प्री-प्राइमरी शिक्षा की पर्याप्त सुविधाएं शामिल किए जाने का भी संकल्प है।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का नाम बदलकर आशा कार्यकर्ता या दीपम् कार्यकर्ता करना चाहिए। प्रस्ताव का समर्थन करते हुए डीएमके के पी. विल्सन ने कहा कि 12वीं तक की शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए। आम आदमी पार्टी (आप) की स्वाति मालीवाल ने सुधा मूर्ति के संकल्प का पुरजोर समर्थन करते हुए जापान और फिनलैंड मॉडल के शिक्षा मॉडल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे ज्यादा विकसित देश अपने बच्चों की शिक्षा, मानसिक विकास और स्वास्थ्य पर बड़ा निवेश करते हैं। -- इंडिगो संकट सहित कई मुद्दे उठे राज्यसभा में शुक्रवार को शून्यकाल के दौरान सदस्यों ने हालिया इंडिगो संकट, वन क्षेत्र में सड़कों का अभाव, सोशल मीडिया की रील और युवाओं की मौत के मामलों में वृद्धि सहित विभिन्न मुद्दे उठाए। सभी ने केंद्र सरकार से इनके समाधान की मांग की।
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