हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर कानून संबंधी फैसले में किया संशोधन

Newswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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राजस्थान हाईकोर्ट ने उभयलिंगी आरक्षण पर अपने हालिया फैसले में संशोधन किया है। अदालत ने ट्रांसजेंडरों के लिंग पहचान के अधिकार को छीनने वाले अधिनियम पर गंभीर टिप्पणियां की। न्यायमूर्ति मोंगा और पुरोहित ने कुछ अनुच्छेदों को हटाने से इनकार करते हुए स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया। यह संशोधन 30 मार्च के फैसले के तीन दिन बाद आया।

हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर कानून संबंधी फैसले में किया संशोधन

राजस्थान हाईकोर्ट ने उभयलिंगी आरक्षण पर अपने हालिया फैसले के कुछ अंशों में संशोधन किया है, जिसमें अदालत ने उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 पर गंभीर टिप्पणियां करते हुए कहा था कि यह अधिनियम ट्रांसजेंडरों के अपने लिंग की पहचान स्वयं करने के अधिकार को छीन लेता है। न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार पुरोहित की पीठ ने अंशों को पूरी तरह से हटाने से इनकार कर दिया, लेकिन इस बात पर सहमति जताई कि इसमें कुछ अनुच्छेद नहीं होने चाहिए थे। अंशों से संबंधित स्पष्टीकरण की मांग कर रहे 29 वर्षीय उभयलिंगी याचिकाकर्ता के वकील विवेक माथुर ने कहा कि अदालत ने स्पष्टीकरण देने के साथ कुछ अंशों को हटाने का आदेश दिया है जो अदालत के अनुसार गलती से शामिल हो गए थे, लेकिन इन्हें शामिल किये जाने की न तो मंशा थी और न ही जरूरत।

यह संशोधन अदालत के 30 मार्च के उस फैसले के तीन दिन बाद आया, जिसमें 2023 की राज्य अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। अधिसूचना में ट्रांसजेंडरों को बिना किसी अलग आरक्षण ढांचे के अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में रखा गया था।

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