भर्ती परीक्षा के लिए रेलवे खुद का तंत्र स्थापित करेगा
नीट पेपर लीक मामले को देखते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे की परीक्षाओं के आयोजन के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर निर्भरता समाप्त करने का फैसला किया है। रेलवे का अपना परीक्षा तंत्र स्थापित होगा, जिसमें स्वायत्त परीक्षा संचालन विंग और हाईटेक टैबलेट्स का उपयोग किया जाएगा।

नीट पेपर लीक मामले को देखते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव रेलवे की परीक्षाओं के आयोजन के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर निर्भरता समाप्त करने जा रहे हैं। अब रेलवे का अपना खुद का परीक्षा तंत्र स्थापित करेगा। मालूम हो कि रेलवे दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा आयोजित कराती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेलवे के भीतर ही एक स्वायत्त परीक्षा संचालन विंग स्थापित की जाएगी। इसके तहत रेलवे क्लोज्ड लूप डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करेगी, जिसके लिए रक्षा मानकों वाले लाखों हाईटेक टैबलेट्स खरीदने की फाइल को वित्तीय मंजूरी के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। उनमें कोई सामान्य ऑपरेटिंग सिस्टम (जैसे विंडोज या एंड्रॉइड) नहीं होगा, बल्कि वे सिर्फ एक सिंगल फर्मवेयर पर काम करेंगे। इनमें न तो कोई पेनड्राइव लगाई जा सकेगी और न ही इन्हें किसी बाहरी वाई-फाई या इंटरनेट नेटवर्क से कनेक्ट किया जा सकेगा। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि भारतीय रेलवे दुनिया का इकलौता ऐसा संगठन है, जो एक समय में दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा आयोजित कराता है। गत वर्षो में महज 1 लाख पदों के लिए यहां 2.5 करोड़ से अधिक अभ्यर्थी लाइन में थे। रेलवे बोर्ड के रोडमैप के अनुसार, अगले कुछ वर्षों में देशभर में सेफ्टी कैटेगरी (लोको पायलट, स्टेशन मास्टर, ट्रैक क्रू) और नॉन-टेक्निकल (एनटीपीसी) श्रेणियों में करीब 2.5 लाख से अधिक रिक्त पदों पर चरणबद्ध तरीके से मेगा-भर्ती होने जा रही है। इसलिए इस मेगा रिक्रूटमेंट ड्राइव से ठीक पहले परीक्षा तंत्र का पूरी तरह से आंतरिक नियंत्रण किया जा रहा है ताकि पूरी प्रक्रिया पूरी तरह लीक-प्रूफ हो सके।
प्रश्नपत्र किसी सर्वर पर अपलोड नहीं होगा
अश्विनी वैष्णव की सबसे बड़ी योजना यह है कि प्रश्नपत्र किसी कमर्शियल इंटरनेट या क्लाउड सर्वर पर अपलोड ही नहीं होगा। रेलवे के पास देश भर में पटरियों के नीचे बिछा हुआ अपना खुद का ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) नेटवर्क है, जिसे रेलनेट कहा जाता है। प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने के ठीक 5 मिनट पहले इसी पूर्णतः सुरक्षित और इनक्रिप्टेड ओएफसी लाइन के जरिए सीधे परीक्षा केंद्र में रखे मास्टर हब और वहां से सीधे अभ्यर्थी के टैबलेट की स्क्रीन पर भेजा जाएगा, जिससे इंटरनेट पर पेपर लीक होने का कोई चांस ही नहीं बचेगा।
कोई भी परीक्षा केंद्र प्राइवेट नहीं होगा
रेलवे अब अपना खुद का सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर इकोसिस्टम बनाकर निजी कंपनियों की निर्भरता को समाप्त करन चाहता है। परीक्षा केंद्र भी प्राइवेट नहीं होंगे। देश भर में रेलवे के पास हजारों हॉल्स, खाली पड़े बड़े सेन्ट्रल स्कूल, रेलवे कम्युनिटी सेंटर्स और बड़े वर्कशॉप कॉम्प्लेक्स हैं। इन जगहों पर सीसीटीवी, जैमर और बायोमेट्रिक लगाकर इन्हें स्थाई रेलवे डिजिटल असेसमेंट सेंटर्स में बदल दिया जाएगा।
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