‘बार-बार पाला बदलने वाले गवाहों पर भरोसा नहीं’
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से मामले को साबित करने में असफलता पर सवाल उठाया। मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता में यह फैसला सुनाया गया।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि पत्रकार की हत्या के मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित नहीं कर सका। अदालत ने सीबीआई जांच पर भी सवाल उठाया। अदालत ने पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के आरोप से राम रहीम सिंह को शनिवार को बरी कर दिया। सोमवार को जारी 113 पन्नों के फैसले में अदालत ने कहा कि ऐसे गवाह पर भरोसा नहीं किया जा सकता जो ‘बार-बार अपना पाला बदल रहा है।’ मुख्य न्यायाधीश शील नागू के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने 58 वर्षीय डेरा प्रमुख को दोषी ठहराए जाने और आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के करीब सात साल बाद बरी कर दिया।
लांकि, पीठ ने इस मामले में तीन अन्य व्यक्तियों की दोषसिद्धि बरकरार रखी। अदालत ने कहा कि इस अदालत की राय में, अभियोजन पक्ष, ए1 (गुरमीत राम रहीम सिंह) के खिलाफ अपने मामले को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया, जबकि उसने ए2 से ए4 (तीन अन्य आरोपी) के मामले में ऐसा किया।
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