
पंजाब का धुआं दिल्ली को नहीं कर रहा प्रदूषित: भगवंत मान
संक्षेप: दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के लिए पराली जलाने को जिम्मेदार ठहराने पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब का धुआं दिल्ली नहीं पहुंचता। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली का एक्यूआई 400 पार कर गया था, तब पंजाब में 20% धान की कटाई भी नहीं हुई थी। मान ने दिल्ली के प्रदूषण के लिए वाहनों और अन्य कारणों को जिम्मेदार ठहराया।
- पंजाब भवन में प्रेसवार्ता के दौरान कहा, पराली के नाम पर पंजाब को बदनाम किया जा रहा नई दिल्ली, वरिष्ठ संवाददाता। दिल्ली में बढ़ रहे प्रदूषण के लिए पंजाब में पराली जलाने को भी जिम्मेदार माना जाता है, लेकिन पंजाब में सीएम भगवंत सिंह मान ने इससे इनकार किया है। मंगलवार को दिल्ली स्थित पंजाब भवन में प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि पंजाब का धुआं दिल्ली को प्रदूषित नहीं कर रहा है। उनका कहना है कि पंजाब का धुआं दिल्ली तक पहुंचता ही नहीं है, ये बात एनजीटी के रिटार्यड एक्सपर्ट भी कह चुके हैं। उन्होंने कहा कि पराली जलाने के नाम पर पंजाब को बदनाम किया जा रहा है।

भगवंत सिंह मान ने कहा कि उत्तरी जोनल काउंसिल की बैठक में भी दिल्ली की सीएम ने पंजाब की पराली का प्रकरण उठाया था। इस पर उन्होंने कहा कि जब धान के उत्पादन की बात आती है तो केंद्र बड़े गर्व से कहता है कि 150 लाख टन चावल का उत्पादन पंजाब से किया जा रहा है, लेकिन यह भी पता होना चाहिए कि चावल के साथ पराली भी आती है। उनका कहना है कि इस साल बारिश ज्यादा होने की वजह से पंजाब में धान की कटाई देरी से शुरू हुई है। जब पंजाब का 20 फीसदी धान भी नहीं कटा था, तब तक दिल्ली का एक्यूआई 400 पार कर चुका था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पराली जली ही नहीं थी तो दिल्ली का एक्यूआई कैसे बढ़ गया। उन्होंने दिल्ली के प्रदूषण को दिल्ली के वाहनों और अन्य कारणों को जिम्मेदार माना है। भगवंत मान का कहना है कि क्या ऐसा हो सकता है कि पंजाब से धुआं चलकर सीधे दिल्ली पहुंचता हो, जबकि बीच में हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्य भी हैं। यह अजीब दावा है कि पंजाब की पराली का धुआं दिल्ली में आकर ठहर जाए और आगे ही न बढ़े। उन्होंने कहा कि अगर 30 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से रोजाना हवा चले तो पंजाब से दिल्ली तक धुआं पहुंचने में 10 दिन लगेंगे, जबकि इतनी गति से हवा चलती ही नहीं है। पंजाब के सीएम ने कहा कि केंद्र किसी अन्य फसल पर इतनी एमएसपी दे दें कि पंजाब के किसान चावल की खेती ही न करें।

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