
तलाक का मामला लंबित, दूसरी शादी करने पर पति को सजा
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को पहली पत्नी के तलाक के मामले में दूसरी शादी करने पर तीन महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई। न्यायमूर्ति अलका सरीन ने कहा कि पति ने हिंदू विवाह अधिनियम का उल्लंघन किया है। महिला ने कहा कि इस कदम से उसके अधिकारों का हनन हुआ है और उसकी अपील को बेकार कर दिया।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को पहली पत्नी के तलाक का मामला विचाराधीन होने के बावजूद दूसरी शादी करने के लिए तीन महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई है। न्यायमूर्ति अलका सरीन ने महिला द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सजा सुनाते हुए 2,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने कहा कि पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 15 का जानबूझकर उल्लंघन किया। यह धारा स्पष्ट रूप से वैधानिक अवधि के भीतर तलाक की डिक्री को चुनौती दिए जाने पर पुनर्विवाह को प्रतिबंधित करती है। जज ने पति की माफी खारिज करते हुए इस बात पर जोर दिया कि स्थगन आदेश की अवहेलना करना और अपीलीय प्रक्रिया को कमजोर करना दीवानी अवमानना के समान है।
महिला का तर्क था कि पति के इस कदम से अदालत न्यायालय के अधिकार को सीधी चुनौती है। उसने आगे दलील दी कि पति के आचरण ने उसे सुलह के अवसर से वंचित कर दिया और उसकी अपील को अर्थहीन बना दिया। गौरततलब है कि दंपति ने 2012 में शादी की थी, और 2020 में एक पारिवारिक अदालत के आदेश से तलाक भी हो गया था। लेकिन महिला ने तय सीमा में अपील दायर की, जिसके बाद एक खंडपीठ ने 13 अगस्त, 2020 को तलाक की डिक्री पर रोक लगा दी। इसके बावजूद, पति ने अपील की कार्यवाही में औपचारिक रूप से शामिल होने से पहले ही, जनवरी 2021 में दूसरी शादी कर ली।

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