बट्टेखाते में डाले गए कर्ज कई साल के निचले स्तर पर
मुंबई, एजेंसी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तरफ से बट्टेखाते में डाले गए कर्ज की राशि वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर कई वर्षों के निचले स्तर पर आ गई। कर्ज फंसने के मामलों में कमी और बकाया कर्ज की वसूली में सुधार इसके प्रमुख कारण रहे।

मुंबई, एजेंसी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तरफ से बट्टेखाते में डाले गए कर्ज की राशि वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर कई वर्षों के निचले स्तर पर आ गई। कर्ज फंसने के मामलों में कमी और बकाया कर्ज की वसूली में सुधार इसके प्रमुख कारण रहे। सार्वजनिक बैंकों के वित्तीय नतीजों के विश्लेषण से पता चलता है कि बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक और इंडियन बैंक सहित अधिकांश बैंकों ने पिछले आठ वर्षों में सबसे कम कर्जों को बट्टेखाते में डाला。
बैंक के कर्ज की स्थिति
बैंक ऑफ बड़ौदा ने वित्त वर्ष 2025-26 में 6,330 करोड़ रुपये के कर्ज बट्टेखाते में डाले, जो 2017-18 के बाद सबसे कम है। इसी तरह, बैंक ऑफ इंडिया ने 5,735 करोड़ रुपये बट्टेखाते में डाले जो 2015-16 के बाद न्यूनतम स्तर है। इंडियन बैंक का कर्ज बट्टाखाता 2018-19 के बाद सबसे कम 6,695 करोड़ रुपये रहा। इसी तरह, इंडियन ओवरसीज बैंक का 1,189 करोड़ रुपये रहा, जो कई वर्षों के निचले स्तर पर है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले वित्त वर्ष में 1,718 करोड़ रुपये के कर्ज बट्टेखाते में डाले, जो 2021-22 के बाद सबसे कम है।
बट्टेखाते में डालने की प्रक्रिया
आमतौर पर बैंक उन कर्जों को बट्टेखाते में डालते हैं, जिनकी वसूली की संभावना कम होती है और जिनके लिए 100 प्रतिशत वित्तीय प्रावधान करना पड़ता है। कर्ज को बट्टेखाते में डालने से बैंकों का बहीखाता साफ-सुथरा होता है और फंसे कर्ज (एनपीए) का स्तर कम दिखता है। हालांकि, बैंक फंसे कर्ज को बट्टेखाते में डालने के बाद भी वसूली की कोशिश जारी रखते हैं, ताकि बाद में मुनाफे को समर्थन मिले।
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