मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में बंद के कारण जनजीवन बाधित
मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में कुकी संगठन के लोगों ने नवगठित सरकार में अपने समुदाय के विधायकों की भागीदारी के विरोध में पूर्ण बंद का आह्वान किया। इससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ, बाजार बंद रहे और सड़कों पर वाहनों का आवागमन कम हो गया। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।

- सरकार में शामिल होने पर अपने समुदाय के विधायकों का विरोध कर रहे हैं कुकी संगठन के लोग - उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन समेत दो अन्य विधायक नवगठित सरकार में हुए हैं शामिल चुराचांदपुर/इंफाल, एजेंसी। मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में शुक्रवार को बंद के कारण सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा। जिले में दो आदिवासी संगठनों ने नवगठित राज्य सरकार में कुकी-जो समुदाय के विधायकों की भागीदारी के विरोध में पूर्ण बंद का आह्वान किया था, जिसका असर भी देखने को मिला। उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन समेत दो अन्य विधायक नवगठित सरकार में शामिल हैं। यह संगठन अलग कुकी प्रशासन की मांग कर रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि जिले में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और जिला मुख्यालय शहर के महत्वपूर्ण स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि बंद समर्थकों ने सुबह ही जिला मुख्यालय शहर के कुछ हिस्सों में वाहनों को आवाजाही रोक दी थी। जिले में बाजार बंद रहे और सड़कों पर वाहनों का आवागमन नहीं के बराबर रहा। शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों में भी उपस्थिति बहुत कम रही। कुकी छात्र संगठन की चुराचांदपुर इकाई ने जिले में शुक्रवार आधी रात से 24 घंटे का पूर्ण बंद रखा था, जबकि एक अन्य संगठन 'ज्वाइंट फोरम ऑफ सेवन' (जेएफ-7) ने सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक बंद की अपील की थी। कुकी महिला मानवाधिकार संगठन (केडब्ल्यूओएचआर) भी बंद में शामिल रहा। जिला मुख्यालय के तुइबोंग क्षेत्र में बंद का सर्वाधिक असर दिखने को मिला। - विधायक के समर्थन में उतरा संगठन जहां कुकी-जो विधायकों को सरकार में शामिल पर अपने समुदाय के लोगों के भारी विरोध का सामना कर रहे हैं। वहीं, 'इंडीजीनियस ट्राइब्स एडवोकेसी कमेटी' (फेरजवाल और जिरिबाम जिला) विधायक एन सनाते के समर्थन में उतर गया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर उनको डराने-धमकाने, अपमानित करने, धमकी देने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, तो इसे फेरजवाल और जिरिबाम जिलों के आदिवासियों का अपमान माना जाएगा। - गुरुवार को भड़क गई थी हिंसा बृहस्पतिवार शाम को तुइबोंग वन द्वार के पास भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं। सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे ताकि भीड़ को तितर-बितर किया जा सके। भीड़ ने भी पथराव किया। अधिकारियों ने बताया कि झड़पें शुक्रवार तड़के तीन बजे तक जारी रहीं, जिसमें दो प्रदर्शनकारी घायल हो गए।
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