
एम्स की तीन उलझी परियोजनाएं को ‘प्रगति’ ने समय पर पूरा किया
प्रधानमंत्री कार्यालय की निगरानी में चल रही प्रगति योजना के तहत, स्वास्थ्य मंत्रालय ने जम्मू, गुवाहाटी और बीबीनगर के तीन एम्स परियोजनाओं को समय पर पूरा किया। स्थानीय समस्याओं को हल करने के लिए लगातार बैठकें की गईं, जिसके बाद अब ये एम्स संचालित हो चुके हैं और एक करोड़ से ज्यादा ओपीडी मरीजों का इलाज कर चुके हैं।
- जम्मू, गुवाहाटी और बीबीनगर एम्स में स्थानीय स्तर पर थीं अड़चनें नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। प्रधानमंत्री कार्यालय की निगरानी में चलने वाली प्रगति योजना के चलते स्वास्थ्य मंत्रालय के तीन एम्स की परियोजना समय पर पूरी हुई हैं। यदि ‘प्रगति’ के जरिये इन्हें राज्यों संग तेजी से तालमेल कर आगे नहीं बढ़ाया जाता तो इनके शुरू होने में लंबा विलंब हो सकता था। दरअसल, एम्स जम्मू, गुवाहाटी और बीबीनगर में स्थानीय स्तर पर कई अड़चनें आ रही थीं जिन्हें ‘प्रगति’ की समीक्षा बैठकों के चलते दूर किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, जम्मू एम्स के निकट श्मशान घाट होने की समस्या थी।
साथ ही बोरवेल नहीं हो पाने के कारण पानी की समस्या उत्पन्न हो रही थी। वहीं, गुवाहाटी एम्स के लिए जो जमीन मिली थी, वह करीब-करीब एक झील जैसी हालात में थी। वहां पानी की निकासी का प्रबंधन चुनौती था। जबकि तेलंगाना के बीबीनगर में एम्स के लिए बनी जमीन के ऊपर हाई वोल्टेज बिजली लाइन गुजर रही थी। साथ ही वहां पानी की आपूर्ति में भी दिक्कत थी। इन तीनों परियोजनाओं को ‘प्रगति’ में लिया गया। इसके बाद राज्य सरकारों के साथ लगातार बैठकें जारी रहीं और अंतत: तीनों एम्स की समस्याओं का समाधान निकाला गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि आज ये तीनों एम्स संचालित हो चुके हैं। एक करोड़ से ज्यादा ओपीडी मरीज देख चुके हैं। इनमें मेडिकल कॉलेजों का भी शुभारंभ हो रहा है। लगातार नए विभागों की स्थापना हो रही है। ‘प्रगति’ में इन परियोजनाओं को लिए जाने से यह समय पर पूरे हुए हैं। दरअसल, स्वास्थ्य मंत्रालय के कई और प्रोजेक्ट भी प्रगति के तहत आते हैं, जिनमें कालाजार, तपेदिक, लेप्रोसी, प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना तथा मिशन इंद्रधनुष प्रमुख हैं। इसके चलते समय-समय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वयं इनकी समीक्षा की जाती है तथा प्रधानमंत्री कार्यालय लगातार ‘प्रगति’ की समीक्षा करता है। मालूम हो कि केंद्र सरकार की प्रगति (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्पलीमेंटेशन) एक बहु-मॉडल, बहुउद्देशीय मंच है। इसका काम यह सुनिश्चित करना है कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और सरकारी योजनाओं में देरी न हो और उन्हें समय पर पूरा किया जाए, साथ ही आम लोगों की शिकायतों का समाधान किया जाए।

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