
संपादित---एल्जाइमर डे: दिमाग को व्यस्त रखने से भूलने की बीमारी का खतरा कम
- एम्स के न्यूरोलॉजी एवं एनाटॉमी विभाग के मुताबिक देश में 88 लाख लोग हैं
नई दिल्ली, वरिष्ठ संवाददाता। दिमाग को सामाजिक कार्यों, कुछ नया सीखने में व्यस्त रखेंगे तो बुढ़ापे में भी आप डिमेंशिया (याददाश्त, तर्क, भाषा और व्यवहार में धीरे-धीरे गिरावट) की बीमारी से बच सकेंगे। एक बार हो जाने के बाद ठीक न होने वाली इस बीमारी से बचाव के लिए जितना जरूरी दिमाग को व्यस्त रखना है, उतना ही फायदा योग और शारीरिक गतिविधियां भी करती है। दिल्ली एम्स के न्यूरोलॉजी एवं एनाटॉमी विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद और बुढ़ापे में सक्रियता न रहने की वजह से देश में डिमेंशिया के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

2022 के एक अध्ययन के मुताबिक देश में तकरीबन 88 लाख से ज्यादा डिमेंशिया के मरीज हैं। बुधवार को एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग और अल्जाइमर एंड रिलेटेड डिसऑर्डर सोसायटी ऑफ इंडिया नाम की संस्था ने विश्व अल्जाइमर दिवस पर लोगों को जागरूक किया। इस दौरान एम्स की न्यूरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मंजरी त्रिपाठी ने बताया कि भारत में डिमेंशिया से प्रभावितों की बढ़ती संख्या पर ध्यान देने की तत्काल जरूरत है। उन्होंने बताया कि वैस्कुलर डिमेंशिया, लेवी बॉडी डिमेंशिया, फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया, पार्किंसंस रोग, सिफलिस आदि इसके अन्य प्रकार हैं। वर्तमान में भारत में लगभग 88 लाख बुजुर्ग डिमेंशिया से ग्रसित हैं, लेकिन लगभग 10 फीसदी मामलों में सही निदान हो पाता है। ---- ये हैं कारण शोध में सामने आया है कि खराब जीवन शैली, धूम्रपान, शराब का सेवन, जंक फूड का ज्यादा सेवन, शारीरिक श्रम न किया जाना, मधुमेह, उच्च रक्तचाप की वजह से भी डिमेंशिया होने का खतरा बढ़ जाता है। जीवन शैली बदलकर डिमेंशिया के खतरे को 40 फीसदी तक कम कर सकते हैं। इसके अलावा सामाजिक जुड़ाव न होना, अकेलापन भी इसका बड़ा कारण है। उन्होंने बताया कि शोध में पाया गया है कि यह बीमारी शहरों से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। ---- व्यवहार में परिवर्तन आने लगे तो जांच कराएं एम्स की प्रोफेसर डॉ. मंजरी त्रिपाठी ने बताया कि डिमेंशिया की शुरुआती स्थिति में कोई विशेष लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन इससे ग्रसित व्यक्ति के व्यवहार में धीरे-धीरे बदलाव आने लगता है। किसी बात को बार-बार दोहराना, खाना खाने के बाद भी भूल जाना और दोबारा इच्छा जताना, अपने व्यवहार के बिल्कुल विपरीत व्यवहार करने लगना इसके प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखे तो परिवार के लोग उस व्यक्ति को डॉक्टर के पास ले जाएं। योग से भी हो सकता है बचाव एम्स की एनाटॉमी विभाग की प्रोफेसर व योगा विशेषज्ञ डॉ. रीमा दादा ने बताया कि जीवन शैली में बदलाव के साथ-साथ योग को अपनाकर भी लोग डिमेंशिया की संभावना को कम कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि रोजाना करीब 45 मिनट प्राणायाम, अनुलोम-विलोम और विशेषज्ञों की सलाह लेकर अन्य योगासान करने चाहिए।

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