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13 जुलाई, 2020|12:49|IST

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कोरोना का असर: दिल्ली मेट्रो को पहली बार घाटे में चलाने की तैयारी, घटेगा 85% तक राजस्व

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दिल्ली में परिचालन के पहले दिन से मुनाफे में चलने वाली दिल्ली मेट्रो को कोरोना के चलते वित्तीय संकट से जूझना पड़ सकता है। इससे भविष्य में मेट्रो की दूसरी योजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। मेट्रो को लोन चुकाने में भी मुश्किलें आ सकती हैं। मेट्रो सेवा फिर से शुरू करने को लेकर दिल्ली सरकार केंद्र सरकार को मसौदा भेज चुकी है। केंद्र सरकार की हरी झंडी का इंतजार है। अगर मेट्रो का परिचालन जल्द शुरू नहीं हुआ तो वित्तीय संकट पैदा हो सकता है। प्रस्तुत है हिन्दुस्तान की रिपोर्ट...

रोजाना 10 करोड़ की आय प्रभावित

दिल्ली मेट्रो का परिचालन न होने से मेट्रो का 650 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व कम हुआ है। इससे मेट्रो की रोजाना लगभग दस करोड़ की आमदनी प्रभावित हुई है। 65 दिन से ज्यादा मेट्रो सेवा को बंद हुए हो गए है। दिल्ली में 22 मार्च से मेट्रो सेवा बंद है।

राजस्व कम रहने की उम्मीद 

मेट्रो के पिछले कुछ वर्षों के राजस्व में लगातार वृद्धि देखने को मिली है। लेकिन इस वित्तीय वर्ष 2020-21 में अभी तक मेट्रो का परिचालन बंद हैं, जिससे भविष्य में मेट्रो के वार्षिक राजस्व पर खासा असर देखने को मिल सकता है। मेट्रो को सबसे ज्यादा राजस्व मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों से मिलता है।

300 ट्रेन रोज पांच हजार से अधिक फेरे लगाती है

दिल्ली मेट्रो के पास चार, छह और आठ कोच वाली 300 से अधिक ट्रेनें हैं, जो रोज अलग-अलग लाइन पर 5000 से अधिक फेरे लगाती है। यह दिल्ली एनसीआर के छह शहरों गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम, बहादुरगढ़ और दिल्ली को आपस में जोड़ती है।

जापानी कंपनी का लोन चुकाना पड़ता है

दिल्ली मेट्रो को जापानी की एक कंपनी को लोन की राशि भी चुकानी होती है। कंपनी को आखिरी किस्त 574 करोड़ रुपये की दी गई थी। अगर मेट्रो का परिचालन जल्द शुरू नहीं हुआ तो किस्त को लेकर भी संकट पैदा हो सकता है।

भरपाई के बारे में पता नहीं

दिल्ली मेट्रो के एक अधिकारी के अनुसार लॉकडाउन के कारण जो 650 करोड़ रुपये का राजस्व प्रभावित हुआ है, उसकी भरपाई कितने समय में और कैसे होगी, इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता मेट्रो का परिचालन कोरोना संकट में ठीक ढंग से करना है, जिससे यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। जब ये सब सही तरीके से शुरू हो जाएगा, तब भरपाई की भी सोचेंगे।

85% तक राजस्व घटेगा

सोशल डिस्टेंसिग के चलते मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या सीमित हो जाने से मेट्रो का परिचालन घाटे के साथ होगा। आठ कोच वाली मेट्रो में पहले ढाई हजार से अधिक लोग सफर करते थे। अब सेवा शुरू होने के बाद उसमें 400 यात्री ही सफर कर पाएंगे। इससे मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या भी कम होगी। यात्रियों की संख्या कम होने से मेट्रो का रोजाना का 85% तक राजस्व घटेगा।

पिछले कुछ साल के मेट्रो के राजस्व संबंधी आंकड़ों पर नजर डाले तो मेट्रो लाइन का विस्तार और यात्रियों की संख्या बढ़ने से मेट्रो के राजस्व में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2016-17 में मेट्रो को 2313 करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जिसमें 1784 करोड़ रुपये का राजस्व यात्रियों से और बाकी 529 करोड़ रुपये विज्ञापन सहित दूसरी चीजों से प्राप्त हुआ था। वर्ष 2017-18 में मेट्रो का यह राजस्व बढ़कर 3152 करोड़ रुपये पहुंच गया, जिसमें 2616 करोड़ यात्रियों से और 536 करोड़ दूसरे चीजों के शामिल है। वहीं, वर्ष 2018-19 में यह राजस्व 3715 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 3121 करोड़ यात्रियों और 594 करोड़ रुपये की राशि विज्ञापन सहित दूसरी चीजों से प्राप्त हुई। वित्तीय वर्ष 2019-20 राजस्व संबंधी आंकड़ों की रिपोर्ट अभी मेट्रो द्वारा जारी नहीं की गई है।

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  • Web Title:Preparations to run Delhi Metro for the first time in loss it will reduce revenue by upto 85 percent