वसा के अधिक सेवन से प्रसव बाद बढ़ता है महिलाओं में मोटापा
::विश्व मोटापा दिवस:: नंबर गेम 210 प्रसूता महिलाओं पर अध्ययन किया गया 20 से

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। प्रसव के बाद खानपान में प्रोटीन और ऊर्जा युक्त पौष्टिक आहर की कमी, कार्बोहाइड्रेट व वसा युक्त आहार का अधिक सेवन महिलाओं में मोटापे का अहम कारण बनता है। ऐसे में खानपान में पौष्टिक आहार, माइक्रो न्यूट्रियंट का सेवन, व्यायाम और नियमित निगरानी से प्रसव के बाद शरीर का वजन बढ़ने से रोका जा सकता है। एम्स के डॉक्टरों द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के साथ मिलकर किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है, जो ओबेसिटी रिसर्च एंड क्लीनिक प्रैक्टिस जर्नल में प्रकाशित भी हुआ है। अध्ययन में कहा गया है कि प्रसव के बाद महिलाओं में शरीर का वजन बढ़ना एक बड़ी समस्या है।
इस वजह से बहुत महिलाएं मोटापे से पीड़ित हो जाती हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे पांच के आंकड़े के अनुसार भी पुरुषों की तुलना में महिलाएं मोटापे से अधिक पीड़ित होती हैं। इसका एक कारण प्रेग्नेंसी व प्रसव के बाद मोटापे की समस्या है। प्रसव के बाद मोटापे की समस्या के मद्देनजर एम्स के गायनी, मेडिसिन सहित कई अन्य विभागों के डॉक्टरों ने यह अध्ययन किया। इस अध्ययन में 210 प्रसूता महिलाएं शामिल की गईं। उनकी उम्र 20 से 44 वर्ष थी। 58.8 प्रतिशत महिलाएं संयुक्त परिवार से थीं। 54.5 प्रतिशत महिलाओं ने उच्च शिक्षा प्राप्त की थी और 37.2 प्रतिशत महिलाएं मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती थीं। 57.6 प्रतिशत महिलाओं का सिजेरियन प्रसव हुआ था। प्रसव के बाद 73.7 प्रतिशत महिलाओं ने अपने बच्चों को तीन से चार माह स्तनपान कराया था। अध्ययन में पाया गया कि प्रसव बाद महिलाओं का औसतन वजन छह किलो बढ़ा। प्रसव के छह महीने में 55.2 प्रतिशत महिलाओं का वजन पांच किलोग्राम से अधिक बढ़ा। अध्ययन में पाया गया कि प्रसव के बाद शुरुआती तीन महीने में महिलाओं के खानपान में कार्बोहाइड्रेट व वसा युक्त आहार अधिक शामिल था। प्रोटीन व पौष्टिक आहर का सेवन कम था। इससे शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल रही थी। कार्बोहाइड्रेट व वसा के अधिक सेवन से वजन बढ़ता है। खानपान के अलावा सामाजिक आर्थिक स्थिति भी मोटापे का एक कारण बनता है।
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